संतकबीरनगर। बिजली निगमों के निजीकरण के विरोध में शनिवार को बिजली कर्मियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना दिया। इस दौरान बिजली कर्मियों ने कहा कि बिजली संशोधन विधेयक संसद के बजट सत्र में पेश किए जाने की तैयारी है। यदि यह विधेयक पास हुआ तो देश का बिजली ढांचा बर्बाद हो जाएगा। बिजली कर्मी इसका हर स्तर पर विरोध करेंगे।
संघर्ष समिति के पदाधिकारी दिलीप मौर्य ने कहा कि नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लाइज एंड इंजीनियर्स द्वारा केंद्रीय विद्युत मंत्री को भेजे गए हड़ताल नोटिस में उत्तर प्रदेश में चल रही निजीकरण प्रक्रिया को तुरंत रद्द करने की मांग की है। ऐसा नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। संघर्ष समिति के पदाधिकारी मनोज यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मी केवल पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 के खिलाफ भी निर्णायक संघर्ष करेंगे और इसे हर हाल में वापस कराने के लिए आंदोलन जारी रहेगा। संघर्ष समिति के पदाधिकारी संजय यादव ने कहा कि यह विधेयक पूरे बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपने की साजिश है, जिसका सीधा नुकसान किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं और गरीब वर्ग को होगा।
धरना में इंजीनियर मुकेश गुप्ता, संतोष गुप्ता, सुनील प्रजापति, सूरज प्रजापति, नारायण चंद्र चौरसिया, आशीष कुमार, भास्कर पांडेय, श्रवण प्रजापति, धीरेंद्र यादव अशोक कुमार, आर्यन कुमार, वीरेंद्र मौर्य, रंजन कुमार आदि मौजूद रहे।