निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन करते बिजली कर्मी
संतकबीरनगर। विद्युत निगमों के निजीकरण व कर्मचारियों के उत्पीड़न के विरोध में बृहस्पतिवार को बिजली कर्मियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना दिया। इस दौरान बिजली कर्मियों ने निजीकरण रोकने के लिए निर्णायक संघर्ष का संकल्प लिया।
संघर्ष समिति के पदाधिकारी सूरज प्रजापति ने कहा कि बिजली की बढ़ी हुई मांग को देखते हुए बिजली कर्मी आंदोलन के साथ-साथ उपभोक्ताओं की समस्याओं को भी सर्वोच्च प्राथमिकता पर अटेंड कर रहे हैं। इसके बाद भी लगातार उत्पीड़न की कार्रवाई की जा रही है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारी रमेश प्रजापति ने कहा कि निजीकरण किया गया तो लगभग 76,500 कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ जाएगी।
उन्होंने कहा कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा निजीकरण के बाद बिजली कर्मियों को तीन विकल्प दिए गए हैं। पहला विकल्प यह है कि वे निजी कंपनी की नौकरी स्वीकार कर लें। दूसरा विकल्प यह है कि वे अन्य विद्युत वितरण निगमों में वापस आ जाए और तीसरा विकल्प यह है कि वे स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति लेकर घर चले जाएं। यह अन्यायपूर्ण और बिजली कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
धरना में इंजीनियर मुकेश गुप्ता, आशीष कुमार, सुनील कुमार प्रजापति, हरिप्रसाद, सत्येंद्र सिंह, रामलखन, अशोक कुमार, भास्कर पांडेय, श्रवण प्रजापति, चंद्रकेश मौर्य, दिनेश शर्मा, हरिप्रसाद, नारायन चौरसिया, दिलीप मौर्य, विवेक पासवान आदि मौजूद रहे।