संतकबीरनगर। विद्युत निगमों के निजीकरण के विरोध में सोमवार को बिजली कर्मचारियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना दिया। इस दौरान बिजली कर्मियों ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर औद्योगिक अशांति का वातावरण बनाने का आरोप लगाया और कहा कि जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया जाता है तब तक धरना-प्रदर्शन चलता रहेगी। इसके साथ ही एक मई को वृहद आंदोलन की चेतावनी दी है।
बिजली कर्मचारी संघर्ष समिति के इंजीनियर राजेश कुमार ने कहा कि निजीकरण के विरोध में शांतिपूर्वक ध्यानाकर्षण सभाएं और प्रदर्शन किया जा रहा है। 152 दिन हो गए हैं, लेकिन पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने संघर्ष समिति से इस मामले में एक बार भी वार्ता करना जरूरी नहीं समझा। प्रबंधन उल्टे बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों और अभियंताओं का उत्पीड़न करने पर उतारू है।
संघर्ष समिति के इंजीनियर मुकेश गुप्ता ने कहा कि अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजेक्शन कंसल्टेंट के साथ मिली भगत है। इसी कारण कंसल्टेंट का झूठा शपथ पत्र और सभी फर्जी दस्तावेज सामने आने के बावजूद प्रबंधन कंसल्टेंट की नियुक्ति को रद्द नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक मई को बाइक रैली निकाली जाएगी। इस दौरान धीरेंद्र यादव, सुनील प्रजापति, नारायण चंद्र चौरसिया, संजय यादव, आशीष कुमार, दिलीप सिंह, राघवेंद्र, रामअचल यादव, पुष्पेंद्र भारती, भाष्कर पांडेय, दिनेश चंद्र, विवेक