संतकबीरनगर। नेदुला में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में शनिरवार को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की कथा सुनाई गई। कथावाचक मानस जी महाराज ने कहा कि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है। अहंकार करने से बुद्धि नष्ट हो जाती है। यह मनुष्य के नाश का कारण बन जाता है।
कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजा तथा कंस वध की कथा सुनाई। कृष्ण जन्मोत्सव की बधाई के साथ ही माखन चोरी, पूतना उद्धार और गिरिराज गोवर्धन धारण जैसी अद्भुत लीलाओं का वर्णन सुन श्रोता भाव विभोर हो उठे।
कथा व्यास ने कहा कि दूसरों को सुखी रखने की इच्छा ही लीला है। भगवान श्रीकृष्ण ने यही लीला की, जिससे सभी गोकुलवासी सुखी और संपन्न थे। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के माखन चोरी करने का मतलब मन की चोरी से है। कन्हैया ने अपने भक्तों के मन की चोरी की। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के जन्म लेने पर कंस ने उनकी मृत्यु के लिए राक्षसी पूतना को भेजा।
राक्षसी पूतना ने भेष बदलकर भगवान कृष्ण को अपना जहरीला दूध पिलाने का प्रयास किया, परंतु भगवान ने उसका वध कर उसका उद्धार किया।
इसी तरह ब्रज वासियों द्वारा गोवर्धन की पूजा करने से इंद्र नाराज हो गए। उन्होंने गोकुल को नष्ट करने के लिए भारी वर्षा की। इसे देखकर समस्त ब्रजवासी परेशान हो गए। इंद्र का प्रलय देखकर भगवान कृष्ण अपनी कनिष्ठ अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर सभी को उसके नीचे छिपा लिया, जिससे इंद्र का घमंड चकनाचूर हो गया। मथुरा को कंस के अत्याचार से बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया।
कथा में मुख्य यजमान रमाशंकर मिश्र, जड़ावती देवी, दुर्गेश मिश्र, केशव गुप्ता, उमेश मिश्र, परमात्मा प्रसाद पांडेय, कुलदीप मणि मिश्र, उमेश दुबे आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।