संतकबीरनगर। ब्रिटिश नागरिकता, मदरसा शिक्षक के रूप में वेतन और पेंशन प्राप्त करने तथा विदेशी फंडिंग से जुड़ी जांच के बीच मौलाना शमशुल हुदा खान का मामला एक बार फिर चर्चा में है। नोटिस रिसीव कराने के लिए ईडी की टीम मौलाना के खलीलाबाद स्थित आवास पर शनिवार को सुबह कोतवाली पुलिस के साथ पहुंची। मौलाना की अनुपस्थिति में परिजन ने नोटिस लेने से इन्कार कर दिया। इसके बाद वीडियो कॉल से मौलाना की टीम से बातचीत हुई। उन्होंने ईमेल के जरिये नोटिस भेजने की मांग करते हुए ईडी अधिकारियों के समक्ष अपने अधिवक्ता के माध्यम से जवाब देने की बात कही।
पुलिस की तरफ से नोटिस किस मामले में जारी किया गया है और ईडी की ओर से इसे ईमेल के माध्यम से भेजने के अनुरोध पर क्या निर्णय लिया गया, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। मौलाना शमशुल हुदा खान मूलरूप से संतकबीरनगर के दुधारा थाना क्षेत्र के देवरियालाल गांव के निवासी हैं। वह आजमगढ़ के मुबारकपुर स्थित अनुदानित मदरसे में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत थे।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, 19 दिसंबर 2013 को मौलाना ने ब्रिटिश नागरिकता हासिल की। इसके बावजूद उन पर भारतीय नागरिकता समाप्त होने की जानकारी छिपाकर सरकारी वेतन, पेंशन और अन्य वित्तीय लाभ लेने का आरोप है। जांच एजेंसी के अनुसार, मौलाना के सेवा संबंधी रिकॉर्ड वर्ष 2007 से 2017 तक कर्मचारी के रूप में दर्ज रहे। उन्हें वर्ष 2017 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का लाभ भी दिया गया।
ईडी ने वेतन, पेंशन, सामान्य भविष्य निधि और अन्य भत्तों के रूप में करीब 53.46 लाख रुपये प्राप्त करने का आरोप लगाया है, जबकि कोतवाल जय प्रकाश दुबे ने बताया कि ईडी लखनऊ यूनिट के उप निरीक्षक नरेंद्र कुमार मौलाना शमसुल हुदा खान को नोटिस रिसीव कराने के लिए आए हुए थे। मौलाना के घर पर न रहने की वजह से परिजन ने नोटिस लेने से इन्कार कर दिया। इसके बाद ईडी टीम वापस चली गई।
53.46 लाख रुपये का भूखंड अस्थायी रूप से कुर्क
इस मामले में ईडी ने दो अक्तूबर को खलीलाबाद स्थित मौलाना के नाम दर्ज 189.75 वर्गमीटर के आवासीय भूखंड को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अस्थायी रूप से कुर्क किया था। एजेंसी के मुताबिक, भूखंड का मूल्य 53.46 लाख रुपये है। ईडी का कहना है कि सरकारी धन से जुड़े मामले की जांच के दौरान सामने आए दस्तावेज के आधार पर यह कार्रवाई की गई। इससे पहले 11 फरवरी 2026 को ईडी ने संतकबीरनगर और आजमगढ़ में संबंधित ठिकानों पर तलाशी ली थी। उस दौरान 17 अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई थी। एजेंसी इन संपत्तियों और संबंधित वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।
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विदेशी फंडिंग और बैंक खातों के लेनदेन की भी जांच
ईडी की जांच केवल वेतन और पेंशन तक सीमित नहीं है। एजेंसी के अनुसार, मौलाना और उनसे जुड़ी संस्थाओं के बैंक खातों में पांच करोड़ रुपये से अधिक की रकम प्राप्त होने के संकेत मिले हैं। इनमें रजा फाउंडेशन और कुल्लियातुल बनातिर रजविया एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी से जुड़े खाते भी शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसी विदेशी चंदे, विभिन्न बैंक खातों में हुए लेनदेन और संपत्तियों के अधिग्रहण के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है। हालांकि, खातों में रकम आने मात्र से किसी लेनदेन का अवैध होना साबित नहीं होता। इसकी प्रकृति और उपयोग की पुष्टि जांच के निष्कर्षों तथा न्यायिक प्रक्रिया से होगी।