सेमरियावां। शासन ने मनरेगा योजना में पारदर्शिता और फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के लिए श्रमिकों की ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य फर्जी जॉबकार्ड को खत्म करना और वास्तविक श्रमिकों की पहचान कर उन्हें श्रमिक योजनाओं का लाभ दिलाना है। नई प्रक्रिया से ई-केवाईसी कराने पर ही श्रमिकों को काम मिलेगा तथा मस्टररोल भरा जा सकेगा।
मनरेगा सेल के मुताबिक, सेमरियावां ब्लाॅक के 113 ग्राम पंचायत में 30 हजार से ज्यादा मनरेगा जॉबकार्ड धारक पंजीकृत हैं। हालांकि, इनमें से 27 हजार 89 जॉब कार्डधारक ही सक्रिय हैं। इन श्रमिकों के ई-केवाईसी कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हालांकि इसकी प्रगति काफी धीमी है। अभी तक 9351 जाॅब कार्ड धारकों की ई केवाईसी हुई है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने श्रमिक हित में पेंशनरों की तरह एनएमएमएस एप को मनरेगा योजनाओं की निगरानी के लिए विकसित किया है। सुपरवाइजर इस एप के जरिए कार्यस्थल पर मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने के साथ ही दिनभर के कार्य का फोटो भी अपलोड कर सकते हैं। इस प्रणाली में ई-केवाईसी और फेस प्रमाणीकरण को जोड़ दिया गया है, जिससे पारदर्शिता के साथ जवाबदेही भी बढ़ जाएगी।
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श्रमिक हित में सरकार ने लिया निर्णय
मनरेगा कार्यों में तमाम तरह की शिकायतें मिलती रही हैं। इसी क्रम में यह भी संज्ञान में आया है कि पंजीकृत श्रमिकों की जगह दूसरे श्रमिकों से काम लिया जाता है। लिहाजा पात्र श्रमिकों को साल में 100 काम नहीं मिल पाता है। इसी को ध्यान में रखकर शासन की ओर से नई ई-केवाईसी प्रणाली के लागू की गई है। उम्मीद की जा रही है कि इस नई व्यवस्था के बाद फर्जीवाड़ा संभव नहीं होगा। कार्यस्थल पर ही मजदूर के चेहरे का प्रमाणीकरण होगा। सही श्रमिक नहीं है तो फेस प्रमाणीकरण फेल हो जाएगा। इससे न तो उसकी उपस्थिति लग सकेगी और न ही कार्य दिवस का भुगतान संभव होगा।
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नई ई-केवाईसी के दौरान मनरेगा श्रमिकों का आधार आधारित फेस प्रमाणीकरण होगा। इसके अलावा इस प्रक्रिया में केवल फोटो ही नहीं बल्कि, श्रमिक को कैमरे के सामने पलक झपकाने, हाथ हिलाने आदि जैसी गतिविधि भी करनी है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि व्यक्ति जीवित है। सत्यापन उसी स्थान पर होगा, जहां मजदूर काम कर रहा होगा। प्रमाणीकरण के बाद मजदूर के जीवित होने का प्रमाणपत्र खुद वेबसाइट पर अपलोड हो जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ श्रमिकों के पास स्मार्टफोन नहीं होता है। उन्हें किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए पंचायत सचिवालय में यह व्यवस्था की जा रही है ताकि श्रमिक वहीं ई-केवाईसी करा लें। जरूरत पड़ने पर ब्लॉक स्तर पर कैंप लगाकर तकनीकी सहायकों की मदद से मजदूरों की ई-केवाईसी कराई जाएगी।
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सक्रिय मनरेगा जॉब कार्डधारकों के लिए ई-केवाईसी करानी जरूरी है। इसके लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की तरफ से विकसित नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम और आधार फेस प्रमाणीकरण एप का उपयोग किया जाएगा। इससे मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी। जाॅब कार्ड धारकों की ई केवाईसी कराई जा रही है। -धर्मेश चंद्र पांडेय, बीडीओ सेमरियावां