संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर/धनघटा। भीषण गर्मी में तहसीलों में पेयजल व्यवस्था लड़खड़ाई हुई है। आलम यह है कि धनघटा तहसील परिसर में 15 वर्ष पूर्व बनी पानी की टंकी जहां शो-पीस बनकर रह गई है, वहीं परिसर में लगा आरओ प्लांट भी खराब पड़ा है। ऐसे में दूरदराज से जरूरतमंद तहसील पहुंचने के बाद शुद्ध पानी के लिए भटकने को मजबूर हो गए है। वहीं मेंहदावल तहसील में भी आरओ प्लांट खराब है। खलीलाबाद में पेयजल व्यवस्था ठीक है। यहां दो आरओ प्लांट हैं।
धनघटा तहसील परिसर में पानी की टंकी का निर्माण करीब 15 वर्ष पूर्व कराया गया था, लेकिन यह टंकी बेकार पड़ी है। इससे गर्मी में तहसील परिसर में आने वाले जरूरतमंदों को पानी के संकट से जूझना पड़ रहा है। तहसील के वरिष्ठ अधिवक्ता लाल शरण सिंह, सुरेंद्र प्रताप सिंह, प्रेम नरायण मिश्र, केशव पाठक, सविता त्रिपाठी आदि ने बताया कि तहसील परिसर में शुद्ध पेयजल व्यवस्था की सुध लेने वाला कोई नहीं है। पानी की टंकी क्यों नहीं संचालित हो रही, इसकी खोज खबर किसी ने नहीं लिया। जिम्मेदार अधिकारी व जनप्रतिनिधि हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
हर साल गर्मी में जिम्मेदार अधिकारियों और नेताओं के दरवाजे खटखटाए जाते हैं, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिलते रहे हैं, जबकि समस्या जस की तस बनी हुई है। अधिवक्ता प्रभु नाथ यादव, हनुमान प्रसाद चौधरी, सुरेंद्र सिंह आदि का कहना है कि आरओ प्लांट ठीक करने के लिए कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया जा गया। अधिवक्ता बोतल बंद पानी से काम चला रहे हैं।
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संबंधित विभाग को इस समस्या के निदान के लिए पत्र भेजा जाएगा। शीघ्र पानी की टंकी का संचालन शुरू कराया जाएगा। साथ ही आरओ ठीक कराने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे।
-रविकांत चौबे, एसडीएम
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मेंहदावल में आरओ प्लांट खराब
मेंहदावल। तहसील परिसर में फरियादियों व वादकारियों एवं अधिकारियों से लेकर अधिवक्ताओं तक की प्यास बुझाने के लिए तीन आरओ प्लांट लगा है, लेकिन तीनों खराब हो गए थे। एक आरओ को ठीक कराया गया, लेकिन वर्तमान में दो आरओ प्लांट खराब पड़ा है, जिसके कारण तहसील में आने वाले लोगों को प्यास बुझाने के लिए भटकना पड़ रहा है।
तहसील में स्थित तहसीलदार कार्यालय के बगल में नगर पंचायत प्रशासन के पूर्व अध्यक्ष मोतीलाल जायसवाल की ओर से आरओ प्लांट लगाया गया है, जिस समय तहसील में यहां आरओ प्लांट लगा था, लोगों को काफी सुविधा मिल रही थी, लेकिन लंबे समय से यह प्लांट खराब पड़ा है। यही स्थिति तहसीलदार न्यायालय के बगल में स्थित आरओ प्लांट की भी है, जो लंबे समय से खराब है। अधिवक्ताओं से लेकर फरियादियों तक को प्यास बुझाने के लिए भटकना पड़ता है। जबकि कई बार शिकायत दर्ज करने के बाद कैंटीन के बगल में स्थित खराब पड़े आरओ प्लांट को तहसील प्रशासन ने कुछ दिन पूर्व दुरुस्त कराया है, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिली है। तहसील परिसर में मात्र एक इंडिया मार्का हैंडपंप लगा है। इसके अतिरिक्त प्यास बुझाने के लिए कोई व्यवस्था तहसील प्रशासन की तरफ से नहीं की गई है।
फरियादी मोहम्मद मुस्लिम, रमजान अली, दयासागर, श्रीराम यादव, रामेश्वर, झिनक, राजू आदि लोगों का कहना है कि तहसील परिसर में स्थापित आरओ प्लांट खराब होने प्यास बुझ पाना काफी मुश्किल हो गया है।
तहसीलदार अल्पिता वर्मा का कहना है कि आरओ प्लांट को दुरुस्त कराने का निर्देश दिया गया है। एक आरओ प्लांट दुरुस्त हो चुका है अन्य जो खराब पड़े हैं वह भी जल्द ही ठीक करा दिए जाएंगे।
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तहसील परिसर में आरओ प्लांट काफी समय से खराब है। वर्तमान समय में एक आरओ प्लांट के भरोसे तहसील में आने वाली 1000 आबादी है। जिसके कारण तहसील में आने वाले फरियादियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
- मोनू, नंदौर
तहसील परिसर में शुद्ध पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। भीषण गर्मी पड़ रही है, लेकिन परिसर में लगा आरओ प्लांट खराब होने से यहां आने वाले फरियादियों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। यथाशीघ्र दुरुस्त होना चाहिए।
-संतराम, मेंहदावल
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कागजों में हर घर जल, गांवों में सूखी पाइपलाइन
लोहरैया। सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना हर घर जल का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों में धरातल पर नहीं दिखाई दे रहा है। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई पानी की टंकियां और बिछाई गई पाइप लाइनें कई गांवों में केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही हैं। अधिकतर गांवों में महज 25 प्रतिशत घरों तक ही पानी पहुंच पा रहा है, जबकि कई स्थानों पर टोटियां तक गायब हो चुकी हैं। कहीं सप्ताह में केवल एक दिन पानी की आपूर्ति हो रही है, तो कहीं टंकी बनने के बाद भी आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है।
ऐसा ही मामला मुंडेरा राय गांव में सामने आया है। यहां लगभग तीन वर्ष पूर्व बनी पानी की टंकी से गांव के चंद घरों तक ही पानी पहुंच रहा है, जबकि अधिकतर परिवार आज भी पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के जिम्मेदार लोगों ने अपने चहेतों को ऑपरेटर नियुक्त करवा दिया है, जो समय पर कार्य नहीं करते और न ही जलापूर्ति व्यवस्था को सुचारु रखने में रुचि लेते हैं। परिणामस्वरूप लोगों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीण सतीश राय ने बताया कि गांव के बाहर बनी पानी की टंकी से नियमित आपूर्ति नहीं होती। पाइपलाइन बिछी होने के बावजूद अधिकांश घरों तक पानी नहीं पहुंचता है। वहीं यशवंत ने बताया कि गांव में पाइपलाइन बिछाकर कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है। टंकी तैयार होने के बाद भी सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है।
मुंडेरा शुक्ला गांव की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। यहां भी कभी-कभार ही लोगों के घरों तक पानी पहुंचता है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना का प्रचार तो बड़े स्तर पर किया गया, लेकिन धरातल पर व्यवस्थाएं मजबूत नहीं की गईं। कई गांवों में पाइप डालकर और टोटियां लगाकर कार्य पूर्ण दिखा दिया गया, जबकि नियमित जलापूर्ति आज तक शुरू नहीं हुई। क्षेत्र के दुघरा उर्फ खैरा में टंकी निर्माण कार्य अभी भी जारी है। ग्रामीणों ने बताया कि करीब दो वर्ष पहले गांव में पाइपलाइन बिछा दी गई थी और जगह-जगह टोटियां भी लगा दी गई थीं, लेकिन आज तक लोगों को पानी नहीं मिल सका। गांव निवासी मुन्नीलाल ने बताया कि लोगों को उम्मीद थी कि पानी की टंकी बनने से स्वच्छ पेयजल मिलेगा, लेकिन योजना का लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रहा है। ग्रामीण दयाशंकर, अंगद, झब्बू शर्मा, कैलाश यादव, मनोज गुप्ता ने प्रशासन से मांग की है कि जल जीवन मिशन के कार्यों की निष्पक्ष जांच कराकर नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। ताकि लोगों को योजना का वास्तविक लाभ मिल सके।