धनघटा। उप निबंधक कार्यालय धनघटा में जमीन खरीदने और बेचने के लिए आने वाले लोगों को शुद्ध पानी भी नसीब होने वाला नहीं है, जबकि इस कार्यालय को रोजाना करीब एक करोड़ रुपये स्टांप और सरकारी शुल्क के रूप में लोग अदा करते हैं।
उप निबंधक कार्यालय धनघटा में बाढ़ राहत केंद्र के भवन में लंबे समय से संचालित हो रहा है, जबकि इस कार्यालय के लिए तहसील परिसर में भवन का निर्माण कराया गया है, लेकिन दस्तावेज लेखकों और अधिवक्ताओं के बीच चल रही खींचतान के कारण भवन जहां है, वहीं संचालित हो रहा है। यहां जमीन खरीदने और बेचने के लिए सौ से डेढ़ सौ लोगों का आना जाना लगा रहता है। सरकार को स्टांप और सरकारी शुल्क के रूप में करीब एक करोड़ रुपये क्रेता अदा करते हैं।
यहां आने वाले लोगों के लिए पानी पीने के लिए इंडिया मार्का हैंडपंप तो लगाया गया है, लेकिन वह दो वर्ष से खराब है। यहां सार्वजनिक शौचालय, मूत्रालय का इंतजाम न होने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर जब महिला क्रेता, विक्रेता यहां लंबे समय तक बैठकर रजिस्ट्री होने का इंतजार करते हैं। उनको काफी परेशानी उठानी पड़ती है। बृहस्पतिवार को यहां रजिस्ट्री कराने पहुंचे रामनिवास, इंद्रावती देवी, जगदंबा, रामनारायण आदि का कहना था कि इस कार्यालय पर न तो पानी पीने के लिए कोई इंतजाम है और न ही सार्वजनिक शौचालय है।
इसके कारण यहां पानी के लिए तरसना पड़ता है। पानी पीने की इच्छा होने पर करीब एक किलोमीटर की दूरी तय करके धनघटा चौराहे पर जाना मजबूरी हो जाती है। शौचालय, मूत्रालय के लिए तो खेत में ही जाना पड़ता है।
इस संबंध में प्रभारी सब रजिस्टार उमेश पाल का कहना है कि इंडिया मार्का हैंडपंप की मरम्मत के लिए कई बार पंचायत विभाग के लोगों पत्र लिखा गया है। अन्य संसाधन की भी मांग उच्चाधिकारियों से की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई व्यवस्था नहीं हुई। इससे सबको परेशानी उठानी पड़ रही है।