- सहालग में डीजे के तेज आवाज से परेशान हो रहे लोग, जान पर भी गहराया संकट
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। सहालग में डीजे का शोर लोगों को परेशान कर रहा है। तेज आवाज में गीत बजने के कारण राहगीर व घरों में रहने वाले लोगों को खासी दिक्कत होती है। अब तो यह जान पर भी आफत बन रहा है। बखिरा में डीजे की तेज आवाज के चलते एक अधेड़ की 13 फरवरी की रात मौत हो गई।
शादी व अन्य प्रमुख अवसरों पर डीजे का चलन आम हो गया है। लोग इसमें बज रहे गीतों पर झूमते समय दूसरों की सुविधाओं का ख्याल नहीं रखा जाता है। इस कारण लोगों को दिक्कत झेलनी पड़ती है। कई बार तो एक ही स्थान पर देर तक लोग गाने बजाते हैं। इसके चलते घरों में रहना भी मुश्किल हो जाता है, फिर वहां से भीड़ के हटने के बाद ही राहत मिलती है। पढ़ाई करने वाले छात्र भी खासे परेशान होते हैं।
बखिरा में अधेड़ की मौत ने डीजे की तेज आवाज से सेहत पर पड़ने वाले असर को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यहां के राधेश्याम गुप्ता की मौत के बाद परिवार बदहवास हो गया है। उनका कहना था कि डीजे के शोर से उनकी तबीयत बिगड़ी और बाद में गोरखपुर ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई।
डीजे और लाउडस्पीकर को रात 10:00 बजे के बाद बजाना कोर्ट के नियमों का उल्लंघन है। इससे लोगों की नींद में खलल पड़ता है, और मानसिक तनाव भी होता है। शासन की गाइड लाइन के अनुसार 45 डिसेबल से ज्यादा डीजे नहीं बजाया जा सकता है, लेकिन संचालक 200 डिसेबल तक डीजे बजा रहे हैं। शादियों में इस तरह की स्थिति आम तौर पर देखी जाती है।
बच्चों की प्रभावित होती है पढ़ाई, घरों में भंग होती है शांति
शहर के मुखलिसपुर रोड निवासी धर्मेंद्र ने कहा कि मैरिज हाल में डीजे की तेज आवाज से दिक्कत होती है। शांतिभंग होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। यहीं के दिलीप ने कहा कि डीजे बजने से मोहल्ले में शोर होता है। घरों में कमरों तक तेज आवाज सुनाई देती है। गोला बाजार निवासी पवन ने कहा कि तेज आवाज में डीजे नहीं बजाना चाहिए, सबकी सुविधा का ख्याल रखना चाहिए।
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तेज आवाज बिगाड़ रही सेहत
तेज आवाज में डीजे बजाने पर लोगों को दिक्कत हो रही है। किसी को घबराहट तो किसी की सेहत खराब हो गई। शहर के मुखलिसपुर रोड निवासी दुर्गा प्रसाद ने बताया कि उन्हें शोर से दिक्कत होती है। कुछ दिन पहले डीजे के तेज आवाज से तबीयत में दिक्कत महसूस हुई। इसके बाद चिकित्सक को दिखाया, तब आराम मिला। गोलाबाजार निवासी आशुतोष कुमार ने बताया कि उनके पिता को पूर्व में डीजे के तेज आवाज से घबराहट की समस्या हो गई थी। इसके बाद चिकित्सक को दिखाना पड़ा, तब राहत मिली।
60 डिसेबल तक आवाज सहन कर सकता है कान
डीजे को अधिकतम 45 डेसिबल तक बजाया जा सकता है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉक्टर कुमार सिद्धार्थ के मुताबिक कान की अधिकतम क्षमता 60 डेसिबल तक आवाज सहन करने की होती है। यह निरंतर नहीं होना चाहिए। लंबे समय तक ध्वनि से कान में दर्द, बहरापन, सीने में दर्द और शरीर में कंपन जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। तेज आवाज के कारण दिल की धड़कन बढ़ जाती है। हृदय रोगियों के लिए यह खतरनाक है।
जब बरात आती है तो डीजे की आवाज तेज रहती है, जिससे दिल की धड़कनें बढ़ने लगती हैं। ऐसे में बरात आते समय घर के अंदर चले जाते हैं। परिवार के लोग बाहर नहीं निकलते हैं।
-दिलीप अग्रहरि, गोलाबाजार
बरात जब इधर से गुजरती है तो डीजे के शोर के चलते हम लोग परेशान हो जाते हैं। डीजे का शोर कम होना चाहिए, जिससे लोगों को दिक्कत उत्पन्न न हो। इस पर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।
-हीरालाल त्रिपाठी, बंजरिया
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बखिरा में अधेड़ की हो चुकी है मौत
बखिरा के सहजनवां तिराहे पर नंदलाल गुप्ता की बेकरी की दुकान है। उनके 55 वर्षीय पिता राधेश्याम गुप्ता पूरे दिन दुकान पर रहे। बृहस्पतिवार की रात करीब 10:00 बजे उनकी दुकान के सामने से जा रही बरात में डीजे बज रहा था। तेज आवाज के कारण राधेश्याम की तबीयत बिगड़ने लगी। उपचार के लिए परिजन जिला अस्पताल ले गए। यहां से चिकित्सक ने उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया। रास्ते में मगहर के पास ले जाते समय उनकी मौत हो गई। नंदलाल व इनके पटीदार राजेश गुप्ता ने बताया कि डीजे का बेस तेज था, इस कारण राधेश्याम के सीने में दर्द होने लगा। गोरखपुर ले जाते समय रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया। मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक उन्हें क्या हो गया।
कोट
डीजे बजाने का नियम निर्धारित है। कितना डिसेबल होना चाहिए, वह भी तय है। सभी एसडीएम, सीओ और एसओ को निर्देश दिया गया है कि लोगों को जागरूक कर इसका पालन कराएं। जिससे आम लोग इससे परेशान न हों।
-आलोक कुमार, डीएम