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Sant Kabir Nagar News: फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे दलित उत्पीड़न में फंसाया, जांच में पर्दाफाश

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- अनुसूचित जाति के फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे मगहर नगर पंचायत अध्यक्ष समेत कई पर दर्ज कराई थी रिपोर्ट
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- जांच रिपोर्ट आने के बाद डीएम ने निरस्त किया जाति प्रमाणपत्र

संवाद न्यूज एजेंसी

मगहर (संतकबीरनगर)। फर्जीवाड़ा करके अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र बनवाकर मगहर की नगर पंचायत अध्यक्ष समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट में प्राथमिकी दर्ज कराने का पर्दाफाश हुआ है। डीएम की अध्यक्षता वाली समिति ने इस मामले में तकिया बाजार निवासी अभिमन्यु प्रसाद और उसके परिवार को जारी प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया है।
मगहर के तकिया बाजार निवासी अभिमन्यु प्रसाद ने खुद को अनुसूचित जाति वर्ग का बताते हुए एक विवाद में भाजपा नेत्री और नगर पंचायत मगहर की पूर्व अध्यक्ष संगीता वर्मा, ठेकेदार शैलेश श्रीवास्तव और उमेश चंद्र श्रीवास्तव के विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके साथ ही एक प्रधानाचार्य और एक अधिवक्ता के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए उसने न्यायालय में धारा 156 (3) के तहत प्रार्थनापत्र दिया था लेकिन कोर्ट ने खारिज कर दिया था। अभिमन्यु ने एक हेड कांस्टेबल के खिलाफ भी परिवाद दाखिल कर रखा है।
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अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंगल प्रसाद वर्मा, अधिवक्ता कुलदीप मिश्र और ठेकेदार उमेश चंद्र श्रीवास्तव ने डीएम से शिकायत की थी कि अभिमन्यु प्रसाद फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र के सहारे लोगों को फंसा रहा है। डीएम की अध्यक्षता वाली समिति की जांच में स्पष्ट हुआ कि अभिमन्यु का परिवार अनुसूचित जाति तुरैहा नहीं, बल्कि तुरहा जाति का है, जो किसी भी आरक्षित श्रेणी में सूचीबद्ध नहीं है। इसके बाद अभिमन्यु, उसके पिता रामेश्वर प्रसाद, मां और बहन का अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं ने अभिमन्यु के खिलाफ जालसाजी की प्राथमिकी दर्ज कराने के साथ ही उसके द्वारा सरकार से लिए गए अनुदानों की रिकवरी कराने की मांग की है।
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तुरहा नहीं तुरैहा है अनुसूचित जातियों की सूची मेंजिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति में एडीएम जय प्रकाश, एसडीएम खलीलाबाद सदर और जिला समाज कल्याण अधिकारी शामिल थे। समिति ने अभिलेखीय साक्ष्यों में पाया कि वर्ष 1359 फसली के राजस्व रिकॉर्ड और स्कूल के प्रमाणपत्रों में भी इस परिवार की जाति तुरहा दर्ज है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति शोध प्रशिक्षण संस्थान, लखनऊ की ओर से पुष्टि की गई कि ''तुरहा'' जाति अनुसूचित वर्ग की श्रेणी में नहीं आती। अनुसूचित जाति तुरैहा होती है।
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