संवाद न्यूज़ एजेंसी
धर्मसिंहवा । ईद-मिलादुन्नबी के जुलूस और दुआ पढ़ाने को लेकर चले आ रहे विवाद का समाधान हो गया। सामाजिक कार्यकर्ता राजेश त्रिपाठी व अन्य लोगों के प्रयास से दोनों पक्षों के बीच आम सहमति बन गई। सहमति के अनुसार दारुल उलूम अहमदिया मेराजुल उलूम धर्मसिंहवा के प्रबंधक को जुलूस की स्वीकृति दी जाएगी, जबकि मदरसे के पूर्व प्रधानाचार्य मौलाना अली अहमद के जीवित रहने तक वही दुआ पढ़ाएंगे।
ईद-मिलादुन्नबी के जुलूस व दुआ को लेकर धर्मसिंहवा में कई वर्ष से दो पक्षों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई थी। मामला इतना पेचीदा हो गया था कि एक पक्ष ने जुलूस की स्वीकृति और दुआ पढ़ाने के विवाद को लेकर हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटा दिया था। इससे प्रशासन के सामने भी जुलूस की अनुमति देने और दुआ कराने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।
बृहस्पतिवार को एसडीएम मेंहदावल राजकुमार ने दोनों पक्षों की सुनवाई की। उन्होंने दोनों पक्षों से उनके विचार लिखित रूप में लिए और आपसी सहमति बनाने का प्रयास किया। देर शाम तक मामला सुलझाने की कवायद चलती रही लेकिन दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े थे।
इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता राजेश त्रिपाठी और कुछ अन्य लोगों ने मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ बैठक कर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने का प्रयास किया। बातचीत के बाद तय हुआ कि दारुल उलूम अहमदिया मेराजुल उलूम के प्रबंधक को ईद-मिलादुन्नबी जुलूस की स्वीकृति मिलेगी।
मदरसे के पूर्व प्रधानाचार्य मौलाना अली अहमद के जीवित रहने तक वही दुआ पढ़ाएंगे। उनके अस्वस्थ होने अथवा निधन के बाद दुआ पढ़ाने के संबंध में प्रबंधक को निर्णय लेने का अधिकार होगा। विवाद का समाधान होने के बाद दोनों पक्षों ने राहत की सांस ली।