एक सप्ताह से आंदोलित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शुक्रवार को विकास भवन पर एकत्र हुईं और प्रदर्शन किया।
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एक सप्ताह से आंदोलित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शुक्रवार को विकास भवन पर एकत्र हुईं और प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदेश सरकार के विरोध में नारेबाजी भी की गई। प्रदर्शन के बाद बाल विकास पुष्टाहार के निदेशक आनंद सिंह का पुतला जलाया। विकास भवन के मुख्य गेट पर प्रदर्शन के चलते अफसर तो कार्यालय में बैठे रहे, लेकिन लोग भीतर नहीं जा पाए।
महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की अगुवाई में जिले भर की कार्यकर्ता शुक्रवार सुबह दस बजे विकास भवन गेट पर पहुंचीं और प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष मंजू चौधरी ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका को राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए। जब तक यह संभव न हो तब तक उन्हें 18 हजार और सहायिका को नौ हजार प्रतिमाह मानदेय भुगतान दिया जाए।
बीस वर्ष की सेवा करने वाली कार्यकर्ताओं को दो लाख और इतनी ही सेवा करने वाली सहायिकाओं को डेढ़ लाख दिया जाए। इतना ही 7500 रुपये प्रत्येक वर्ष के हिसाब से अवकाश प्राप्ति या त्याग पत्र देने के स्थित में दिया जाए। सरकारी कर्मचारियों की भांति अन्य सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।जिला मंत्री गरिमा सिंह ने कहा कि अन्य कर्मचारियों की भांति कार्यकर्ता और सहायिका को भी पेंशन देने की मांग की है।
आगे कहा कि प्रत्येक मई माह में सवेतन अवकाश प्रदान किया जाएं। सहायिका को एक सौ तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दो सौ रुपये प्रति वर्ष वेतन वृद्धि दिया जाएं। निर्धारित योग्यता प्राप्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्राइमरी स्कूलों में समायोजन करने का कोटा निर्धारित किया जाएं। पोषहार ढुलाई में वृद्घि किया जाएं। पोषहार केंद्रों पर भेजा जाएं। उनसे अन्य विभागों का कार्य न लिया जाए।
महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के मांग पत्रों पर वर्ष 2012 से लेकर 2015 तक हुए समझौते को लागू किया जाए। पोषाहार और हाटकुक्ड में हो रही जबरन वसूली को बंद कराया जाना उचित है। संघ के संरक्षक अयोध्या प्रसाद ने कहा कि 13 सूत्री मांग है। इसे स्वीकार नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज होगा। शनिवार को सभी कार्यकर्ता परियोजना कार्यालय पर आंगनबाड़्ी कार्यकर्ता व सहायिका मिल कर निदेशक का पुतला जलाएंगी। इस दौरान मंडल संरक्षक के के श्रीवास्तव, विमला मिश्र, ज्ञानमती, वीना, सरोज, विद्यावती आदि उपस्थित रहीं।