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चिकित्सकों की निगरानी में होगा उच्च जोखिम गर्भवती का प्रसव

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चिकित्सकों की निगरानी में होगा उच्च जोखिम गर्भवती का प्रसव
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- मातृ एवं शिशु मृत्यु दर रोकने के लिए उठाए जा रहे कदम
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का प्रसव अब एएनएम सेंटर पर नहीं होगा। जिले में मौजूद चार बड़े स्वास्थ्य केंद्रों पर स्त्री रोग विशेषज्ञ की निगरानी में होगा। इन केंद्रों में सीएचसी हैंसर, खलीलाबाद, मेंहदावल और जिला अस्पताल शामिल हैं। यह कदम मातृ एवं शिशु मृत्यु दर रोकने के लिए उठाए जा रहे हैं।
गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन होने के बाद उनके कार्ड पर मुहर लगती है। इसमें से एक श्रेणी हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) यानि अति गंभीर मरीजों की भी होती है। इन महिलाओं की जांच हायर सेंटर पर कराई जाती है। साथ ही जिले के सभी 102 एंबुलेंस चालकों को यह निर्देश दिया गया है कि जिन महिलाओं के मातृत्व कार्ड पर एचआरपी की मुहर लगी है उनको प्रसव के लिए सीधे जिले में स्थित चार हायर सेंटरों पर ले जाएं। वहां विशेषज्ञों की निगरानी में उनका प्रसव कराया जाएगा। इससे मातृ व मृत्यु दर को रोकने में और सफलता मिलेगी।
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अति गंभीर के दायरे में आने वाली महिलाएं
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खलीलाबाद की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रेनू यादव ने बताया कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का दायरा दो तरह से तय होता है। पहला वर्तमान शारीरिक संरचना के आधार पर जिसमें हीमोग्लोबीन सात ग्राम से कम, ब्लड प्रेशर 140/ 90 से अधिक, वजन 35 किलो से कम, उम्र 35 वर्ष से अधिक, यूरीन में प्रोटीन व शुगर इत्यादि आते हैं। दूसरा पूर्व इतिहास के आधार पर तय होता है जिसमें दो से अधिक एबार्सन, एक मृत बच्चे का पैदा होना, चार बार से अधिक गर्भवती होना, पिछला बच्चा ऑपरेशन से पैदा होना तथा प्रसव के दौरान पूर्व में कोई जटिलता जैसे बच्चा टेढ़ा होना, उल्टा होना, एचआईवी पॉजिटिव होना आदि हो तो वह गर्भवती महिला हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के दायरे में आती हैं।
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मातृ व शिशु मृत्यु रोकने के लिए हाई रिस्क प्रेग्नेंसी महिलाओं का प्रसव बड़े सेंटरों पर कराने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए एंबुलेंस चालकों को निर्देश दिया गया है कि ऐसी महिलाओं को चिह्नित सेंटरों पर ही ले जाएं।
- डॉ. मोहन झा, अपर सीएमओ
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