जतन तमाम, फिर भी महफूज नही है बेटियां
संतकबीरनगर। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर शासन-प्रशासन की ओर से भले ही तमाम जतन किए गए है। लेकिन जिले में बेटियां महफूज नहीं है। कई मामले में पीड़िता अपनों का ही शिकार होती है। इस साल जिले में अब तक 14 दुष्कर्म की घटनाएं घटित हो चुकी है। जबकि पुुुराने चार मुकदमों में कोर्ट का फैसला आया है। दो मुकदमों में दोषियों को सजा हुई और दो मुकदमों में आरोपी दोष मुक्त हो गए।
वर्ष 2019 में पुलिस के रिकॉर्ड में दुष्कर्म की 14 घटनाएं हो चुकी हैं। धनघटा क्षेत्र में एक प्रधान पिता पर उसकी दो बेटियों के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में केस दर्ज हुआ है। आरोपी पकड़ से दूर है। इसी तरह कोतवाली क्षेत्र में एक पत्नी ने अपने पति पर बेटी के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाकर केस दर्ज कराया है। अभी हाल ही में कोतवाली क्षेत्र में एक किशोरी के साथ युवक ने दुष्कर्म किया था। दुधारा क्षेत्र में प्रधान ने कुछ लोगों की मदद से छात्रा के साथ जबरियां रिश्तेदारी के एक युवक से निकाह करा दिया था। इस मामले में प्रधान, मौलवी और दोनों गवाहों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया था। बाद में कोर्ट में छात्रा ने जिस युवक के साथ उसका निकाह हुआ था, उसी के खिलाफ दुष्कर्म करने का बयान दी। उसके बाद पुलिस ने आरोपी युवक पर दुष्कर्म और पाक्सों एक्ट के तहत केस दर्ज करते हुए आरोपी को जेल भेज दिया।
पुलिस के अनुसार 10 सालों में दुष्कर्म के करीब 200 मुकदमे कोर्ट में विचाराधीन है। जबकि इस वर्ष चार मामलों में कोर्ट का निर्णय आया है। वर्ष 2007 में बखिरा क्षेत्र में हुए दुष्कर्म के एक मामले में दोषी को आजीवन कारावास हुई है। इसी क्षेत्र में 2017 में हुए दुष्कर्म के मामले में साक्ष्य के अभाव में आरोपी दोषमुक्त हो गया था। मेंहदावल क्षेत्र में वर्ष 2018 में हुए दुष्कर्म के एक मामले में भी आरोपी साक्ष्य के अभाव में दोष मुक्त हो गया था। जबकि वर्ष 2015 में महुली क्षेत्र में हुए दुष्कर्म के मामले में दोषी को 13 साल की सजा सुनाई गई थी।
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उन्नाव की घटना के आरोपियों को मिले कडी सजा
संतकबीरनगर। उन्नाव में सामूहिक दुष्कर्म पीड़ित युवती को मारपीट कर पेट्रोल डालकर जलाने की घटना से जिले की महिलाओं में आक्रोश है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के साथ दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग को लेकर उबाल है। अमर उजाला से बातचीत में उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बघौली की प्रधानाचार्या निशा यादव ने कहा कि उन्नाव की घटना मात्र सुन लेने के बाद कलेजा हिल गया। इस मामले में आरोपियों को कड़ी सजा मिले। सरकार को चाहिए कि कड़ा कानून बनाए। एचआरपीजी कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर मंजू मिश्रा ने कहा कि उन्नाव की घटना तो अमानवीय कृत्य को दर्शाता है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए आरोपियों को सख्त सजा मिलनी ही चाहिए। भारतीय महिला महासभा की प्रदेश अध्यक्ष शीला यादव ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार की ओर से किए जाने वाले दावों की पोल खुल गई है। सरकार को दुष्कर्म की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कानून बनाने चाहिए। आशा कर्मचारी यूनियन की जिलाध्यक्ष सरोज देवी ने कहा कि महिला अपराध को रोकने के लिए सरकार को सख्त कदम उठना चाहिए। उन्नाव की घटना में शामिल आरोपियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए,ताकि भविष्य में कोई इस तरह का दु:साहस न कर सकें।
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महिला संबंधी अपराधों को रोकने के लिए शासन की ओर से 1090, 112 नंबर की सुविधा दी गई है। साथ ही महिला थाने पर घरेलू परामर्श केंद्र स्थापित कराए गए है। पीड़ितों को रखने के लिए आशा ज्योति केंद्र भी बने हैं। क्राइम अगेस्ट ह्यूमन सेल भी गठित है। कोर्ट में चल रहे मुकदमों के लिए एसपी कार्यालय में मॉनीटरिंग सेल है। दुष्कर्म के मामलों में आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए पुलिस विवेचना पर विशेष ध्यान देती है। कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ जोरदार पैरवी की जाती है।
असित श्रीवास्तव, एएसपी