मुखलिसपुर ओवर ब्रिज पर हुए हादसे के बाद जांच करते कोतवाल।
- फोटो : अमर उजाला
धनघटा। खलीलाबाद गए गोविंद के तोहफे लेकर घर लौटने का बच्चे इंतजार कर रहे थे कि हादसे में उनकी मौत की खबर आ गई। घरवालों पर मानो वज्रपात हो गया हो। उनके करुण क्रंदन से आस-पड़ोस के लोगों की भीड़ जुट गई। पत्नी का रो-रो कर बुरा हाल था और बच्चों की निगाहें पापा को ढूंढ रही थीं।
महुली क्षेत्र के नाथनगर के बड़कापुरवा निवासी 40 वर्षीय गोविंद मद्देशिया पुत्र स्वर्गीय रामनेवास चार भाइयों में दूसरे नंबर के थे। परिवार में पत्नी मंजू के अलावा 14 वर्षीय पुत्री प्रिया, 12 वर्षीय बेटा शंकर, 10 वर्षीय बेटी मुस्कान, सात वर्षीय बेटी भुल्लुर और छह वर्षीय मासूम बेटी बिट्टू हैं।
परिवार के भरण पोषण के लिए गोविंद मांगलिक समारोहों में खाना बनाने का काम करते थे। भाई गुड्डू और सुरेंद्र ने बताया कि गोविंद ने क्षेत्र के नाहरडीह में शादी समारोह में खाना बनाने का सट्टा लिया था। शादी 18 फरवरी को खलीलाबाद के मैरिज हॉल में होनी थी।
उसी के लिए सामान खरीदने और तंदूरी रोटी के कारीगार से संपर्क करने खलीलाबाद गए थे। मार्ग दुर्घटना में गोविंद की मौत की सूचना से घर में कोहराम मच गया। पत्नी मंजू पर तो दुखों का पहाड़ टूट पडा। बच्चों की बेहतर परवरिश से लेकर उनकी उच्च शिक्षा का अरमान चकनाचूर हो गया।
बेटी प्रिया और मुस्कान ने रोते हुए यहीं बताया कि पापा तोहफा लेकर आने की बात कही थी। क्या तोहफा लाते? यह तो पता नहीं, लेकिन पापा की मौत ने उन्हें अनाथ कर दिया। गांव के प्रधान मदन साहू, व्यापारी अशोक मद्देशिया ने बताया कि गोविंद सरल स्वभाव के मृदुभाषी थे। हादसे में हुई उनकी मौत से परिवार को गहरा जख्म मिला है।