दोनों के घर बमुश्किल 100 मीटर की दूरी पर हैं। अब मामले की विवेचना पूरी तरह से पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट पर निर्भर है। शायद इसीलिए पुलिस भी मामले में सुस्त नजर आ रही है।
इस मामले में किशोरी की मां की तहरीर पर गांव के पूर्व प्रधान और उनके भतीजे समेत सात लोगों पर अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट व एससी/एसटी एक्ट आदि धाराओं में केस दर्ज हो गया। पुलिस ने किशोरी को महिला पुलिस के साथ मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा।
शनिवार को इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। गांव में दबी जुबान इस बात की चर्चा है कि गाड़ी तो दलित परिवार के दरवाजे पर पहुंची जरूर थी लेकिन अपहरण का शोर करीब एक घंटे बाद हुआ। वहीं कुछ लोग इस मामले को गंवई राजनीति से भी जोड़ रहे हैं।
लोग इस घटना का जल्दी पर्दाफाश चाहते हैं। परंतु पुलिस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी तथ्यों की गहनता से छानबीन कर रही है। यही वजह है कि पुलिस इस विवेचना में पीड़िता के बयान के साथ-साथ मेडिकल रिपोर्ट पर भी नजर गड़ाए है।
इस संबंध में एसओ धनघटा संतोष तिवारी का कहना है कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की विवेचना की जा रही है। आरोपियों की तलाश भी हो रही है। जल्द ही दोषियों को जेल भेजा जाएगा।