मेंहदावल (संतकबीरनगर)। शांति भंग की आशंका में जेल गए एक आरोपी की जमानत के प्रकरण को लेकर एसडीएम और अधिवक्ताओं के बीच बुधवार को नोकझोंक हुई। बाद में गुस्साए अधिवक्ताओं ने एसडीएम के खिलाफ प्रदर्शन किया। बैठक कर अधिवक्ताओं ने एसडीएम के तबादले की मांग भी की। इधर एसडीएम ने तहसीलदार की आख्या आने के बाद जेल में बंद आरोपी की जमानत स्वीकृत कर दी।
बुधवार को एसडीएम कार्यालय में एक अधिवक्ता और एसडीएम के बीच में किसी बात को लेकर अचानक कहासुनी हो गई। बाद में तमाम अधिवक्ता वहां पहुंच गए और एसडीएम से नोकझोंक करने के बाद प्रदर्शन किए। एसडीएम प्रफुल्ल त्रिपाठी ने बताया कि बखिरा पुलिस ने चार-पांच दिन पूर्व सार्वजनिक जमीन पर कब्जा कर रहे एक शख्स को विवाद करने पर आमादा होने के कारण गिरफ्तार कर शांति भंग की आशंका में चालानी रिपोर्ट दिया था। पुलिस की रिपोर्ट के बाद शख्स को जेल भेज दिया गया था। एक अधिवक्ता उस आरोपी की जमानत के लिए आए थे। उसके बाद तहसीलदार से जमानत प्रार्थना पत्र पर स्पष्ट आंख्या मांगी गई थी, लेकिन तहसीलदार ने लेखपाल की आंख्या को अग्रसारित करते हुए दे दिया। उसी पर दुबारा तहसीलदार से स्पष्ट आंख्या मांग ली। उसी प्रकरण को लेकर एक अधिवक्ता बाताकही करने लगे, लेकिन बाद में कुछ अधिवक्ताओं ने उन्हें संभाला और मामला शांत हो गया। आगे बताया कि तहसीलदार की आंख्या आने के बाद जेल में बंद शख्स को जमानत भी दे दी गई। इधर मामले को लेकर तहसील बार एसोसिएशन के लोगों ने आपातकालीन बैठक बुलाते हुए न्यायिक कार्य का बहिष्कार करने का निर्णय लिया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए अध्यक्ष राजेश त्रिपाठी ने कहा अधिवक्ता समाज के साथ एसडीएम का व्यवहार काफी निंदनीय है। इसका बार एसोसिएशन के सभी सदस्यों ने एकस्वर से समर्थन किया। इस मामले में अधिवक्ताओं ने एसडीएम का अंयत्र स्थानांतरण करने के साथ उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग किया। इस अवसर पर दिवाकर भारती, अकबर अली, नाजिर प्रसाद, माहेश्वर त्रिपाठी, गोपाल प्रसाद, दिलीप भट्ट, इंद्राज, रामकर आदि मौजूद रहे।