नोटबंदी के विरोध में बुधवार को भाकपा कार्यकर्ताओं ने शहर में जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। साथ ही स्टेट बैंक की मुख्य शाखा पहुंचकर प्रधानमंत्री के नोटबंदी के फैसले का विरोध किया। बाद में कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति को संबोधित सात सूत्री ज्ञापन डीएम को दिया।
भाकपा के जिला मंत्री हरजीत कौर के नेतृत्व में कार्यकर्ता चंद्रशेखर आजाद चौक पर एकत्र हुए। यहां से केंद्र सरकार के विरोध में नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला, जो मुखलिसपुर चौराहा, गोलाबाजार होते हुए स्टेट बैंक की मुख्य शाखा पहुंचकर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने नए नोटों को तैयार किए बगैर पांच सौ व एक हजार के पुराने नोट बंद कर दिया, जिससे हर तरफ अफरातफरी मची हुई है। लोगों को घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है, ऊपर से पुलिस की लाठियां खानी पड़ रही है। ऐसी इस प्रकार की तानाशाही जनता स्वीकार नहीं करेगी।
ट्रेड यूनियन कौंसिल के अध्यक्ष शिवकुमार गुप्ता ने कहा कि नोटबंदी के कारण कई लोगों की मौत हो गई, ऐसे लोगों के परिवार को पांच लाख का मुआवजा दिया जाए। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष विजय पाल व मंत्री राम भजन यादव ने कहा कि केंद्र सरकार स्वतंत्र संस्थाओं को पंगु बनाकर देश की जनता पर तानाशाही फैसले थोप रही है। करेंसी तैयार किए बिना नोटबंदी करना किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों आदि को परेशानी में डाल दिया है।
इस दौरान दो हजार के नोट पर रोक लगाने की मांग की। बैंक कर्मियों को राहत व सुरक्षा प्रदान की जाए, सहकारी बैैंकों पर लगी रोक हटाई जाए, पांच सौ व एक हजार की नोट 30 दिसंबर तक चलन में रखा जाए। प्रदर्शन में झिनकू, इंद्रजीत, इंद्रेश, लक्ष्मीना मौर्य, सरोज गुप्ता, रामदरश गुप्ता, दयाराम, पवन कुमार कसेरा, राजाराम, स्वामीनाथ मौजूद रहे।