संतकबीरनगर। जिला उपभोक्ता फोरम ने हाॅस्पिटल व बीमा कंपनी के खिलाफ सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। पीड़िता को 3,49,500 रुपये दस प्रतिशत ब्याज की दर से 60 दिन के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया। साथ ही आर्थिक, शारीरिक, मानसिक क्षति पूर्ति के लिए आठ लाख व मुकदमा खर्च 10 हजार रुपये अदा करने का आदेश सुनाया।
पीड़ित महिला उपभोक्ता अमिता यादव निवासी ग्राम सोहन पोस्ट रामपुर बारह कोनी थाना धनघटा ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से उपभोक्ता फोरम में परिवाद दाखिल किया। परिवाद में कहा कि 2017 में उसके पेट में दर्द की समस्या होने पर एक हाॅस्पिटल से संपर्क किया। जहां पर गाल ब्लेडर में पथरी का होना बताया और ऑपरेशन की सलाह दी। 20 मार्च 2017 को इलाज के लिए तैयार होने पर उसे अस्पताल में भर्ती किया गया।
वहां पर 29 मार्च तक वह भर्ती रही और ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद टांका लगाते समय पेट में रूई छोड़कर बाहर से टांका लगाकर 29 मार्च को डिस्चार्ज कर दिया गया। रूई व अन्य बाहरी वस्तु पेट में छूट जाने के कारण पेट में और दर्द बढ़ने लगा।
कैली अस्पताल बस्ती व दिल्ली में इलाज व पेट का ऑपरेशन 19 अक्तूबर 2019 को फिर हुआ। अस्पताल की लापरवाही से तीन वर्ष तक असहनीय पेट दर्द रहा। उपचार में कुल 3,49,500 रुपये खर्च हुआ। मामले में पीड़िता ने विपक्षी से हुए खर्च की मांग किया तो उसे डांट कर भगा दिया।
मजबूर हो कर पीड़िता ने जिला उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार सिंह व महिला सदस्य संतोष ने पक्षों की बहस सुनने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल के प्रोप्राइटर व ओरिएंटल बीमा कंपनी लिमिटेड के खिलाफ अपना फैसला सुनाया है।