धनघटा तहसील में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते अधिवक्ता।
धनघटा। उप निबंधक कार्यालय भवन के निर्माण में अधिवक्ताओं ने पेंच फंसा कर रख दिया है। लगातार तीन महीने से चल रहे अधिवक्ताओं के आंदोलन के बीच लुका छुपी निर्माण कार्य भी चल रहा था लेकिन सोमवार को अधिवक्ताओं ने एसडीएम और जिला अधिकारी के माध्यम से उसके निर्माण पर पूर्ण विराम लगा दिया। मंगलवार को भी अधिवक्ता आंदोलित रहे। धनघटा तहसील सृजन के बाद उप निबंधक कार्यालय लंबे समय तक किराए के मकान में संचालित होता रहा। उसके बाद तहसील को जब अपना स्थायी भवन मिल गया तो वह बढ़ शरणालय भवन से स्थानांतरित होकर अपने निजी भवन में स्थापित हो गई। उसके बाद बाढ़ शरणालय भवन में उप निबंधक कार्यालय संचालित होने लगा। जो अभी तक वहीं पर संचालित है। तहसील में ही रजिस्ट्री कार्यालय को लाए जाने की मांग अधिवक्ता तभी से करते चले आ रहे हैं। उधर दस्तावेज लेखक यह नहीं चाहते हैं कि उप निबंधक कार्यालय तहसील परिसर में संचालित हो। इसके लिए दस्तावेज लेखक न्यायालय में भी गए।
इसी बीच स्टांप विक्रेता सुभाष गुप्ता ने धनघटा तहसील से करीब एक किलोमीटर दूर उप निबंधक कार्यालय के लिए महामहिम राज्यपाल के नाम जमींन दान में दे दी। शासन ने दान में मिली जमीन पर रजिस्ट्री कार्यालय भवन का निर्माण कराए जाने की स्वीकृति प्रदान करते हुए उसके निर्माण के लिए धन भी अवमुक्त कर दिया। तीन महीने पहले जब दान में मिली जमीन पर रजिस्ट्री कार्यालय भवन निर्माण की आधारशिला रखी गई तो इसकी जानकारी अधिवक्ताओं को हुई। अधिवक्ता निर्माण कार्य रोके जाने के लिए तभी से न्याय कार्यों का बहिष्कार करते हुए आंदोलन कर रहे हैं।
इतना ही नहीं यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के समझ पहुंचा तो उसने सुनवाई के लिए इसे लखनऊ बेंच को स्थानांतरित कर दिया।