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Sant Kabir Nagar News: रंग-बिरंगे चिप्स पापड़ बिगाड़ सकते हैं सेहत

Sat, 08 Mar 2025 11:38 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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बाजार में बिक रही रंग बिरंगी चिप्स।
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संतकबीरनगर। होली में रंग-बिरंगी मिठाइयां व चिप्स, पापड़ सेहत खराब कर सकते हैं। होली के त्योहार को महज छह दिन शेष बचे हैं, बाजार में रंग बिरंगे चिप्स पापड़ की बहार आ गई है, देखने में तो यह बेहद आकर्षक लगते हैं, लेकिन इसमें खराब किस्म के कपड़ों वाला रंग मिला होता है। दो सप्ताह पहले खाद्य टीम ने एक्सपायरी डेट 30 किलो पापड़ जो होली में खपाने की तैयारी थी उसे नष्ट कराया था, इसके साथ पाम ऑयल बरामद हुआ था, जिसे सीज कर दिया था। शुक्रवार को कचरी आदि का सैंपल लिया था।
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होली का त्योहार हो और घर की थाली रंग बिरंगे चिप्स पापड़, गुझिया और मिठाई से न सजी हो बात नहीं बनती। पहले ज्यादातर लोग इन सामानों को घर में बनाते थे जो पूरी तरह से शुद्ध होते थे, लेकिन अब अधिकतर लोग होली में तैयार चिप्स, पापड़, मिठाई और गुझिया खरीदते हैं। जानकारों का कहना है कि बाजार में बिकने वाले चिप्स, पापड़, सेव, रंगीन मिठाई व बची खुची बासी मिठाई से तैयार की गई गुझिया सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह है। खराब स्तर का रंग होने से इसके सेवन से विभिन्न प्रकार की घातक बीमारियां होती हैं। पिछले एक साल में रंगीन चिप्स, पापड़, सेव, पोंगा व बच्चों की मीठी सुपारी आदि के नमूनों की प्रयोगशाला से आई रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आए हैं कि लाल रंग में मर्करी और हरे में कॉपर रहता है, जिनके सेवन से व्यक्ति विभिन्न घातक बीमारियों की चपेट में आ सकता है।


मिलावट खोर खुद तैयार कर रहे चिप्स
वैसे तो ज्यादातर लोग गोरखपुर के साहबगंज मंडी से माल मंगाते हैं। एक स्थानीय व्यापारी की माने कुछ ऐसे है जो यहीं पर कचरी, चिप्स और पापड़ बनाने का काम कर रहे हैं। जिसमे रंग मिला रहे हैं। यह रंग काफी चमकीला होता है, जो लोगों को आकर्षित करता है। इसमें काफी मुनाफा होता है।
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रंगीन खाद्य पदार्थों से ये हो सकती है परेशानी

-गैस और एसिड बनने के साथ पेट संबंधी अन्य बीमारी।
-मिलावटी सामग्री के प्रयोग से पथरी की आशंका रहती है

-रंग के शरीर में जाकर रक्त में घुलने से त्वचा संबंधी रोग की आशंका रहती है

डब्बा बंद गुझिया और नमकीन भी बाजार में उपलब्ध
बाजार में डब्बा बंद गुझिया और नमकीन भी दुकानों पर उपलब्ध है। वैसे तो गुझिया घरों में ही बनाए जाने का रिवाज है, लेकिन कई लोग समय कम होने के कारण बाजार से भी इस समय खरीदते हैं। ऐसे में दुकानों पर इनकी बिक्री हो रही है। वहीं गुझिया 230 से पांच सौ रुपये प्रति किलो तक बाजार में बेची जा रही है। बीते साल गुजिया में प्रयोग होने वाला मावा भी असुरक्षित निकला था।
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एजेंसी पर छापा मारकर पाम ऑयल कराया था नष्ट
खाद्य टीम ने 20 दिन पूर्व मोती चौराहे पर एक एजेंसी पर छापा मारा था। वहां काफी संख्या में पाम ऑयल बरामद हुआ था। इसके साथ ही 30 किलो पापड जो एक्सपायर हो चुका था उसे बरामद किया था। उसे नष्ट कराया था और पाम ऑयल की गुणवत्ता पर संदेह होने के चलते उसे सीज कर दिया था। उसका सैंपल भेजा है। इसके साथ ही शुक्रवार को कचरी और बेसन का नमूना लिया है। जिसमे बेसन पर संदेह जताया है कि इसमें आटा को कलर किया गया है।
कोट
सड़ी सुपारी, सकरीन व कलर से लीवर खराब होने व कैंसर जैसी बीमारी होने का खतरा है। लाल रंग में ऐसे केमिकल होते हैं, जो सीधे लीवर पर अटैक करते हैं। सड़ी सुपारी से पेट खराब होता है। बच्चों में किरमी, पेचिस की शिकायत बढ़ जाती हैं। इससे पीलिया भी हो सकता है। लाल रंग में मर्करी व हरे में कॉपर होता है।
डॉ. वरुणेश दुबे, अधीक्षक, सीएचसी खलीलाबाद
कोट
लगातार छापेमारी की जा रही है। रंग-बिरंगे चिप्स और पाम आयल, कचरी, पापड़ आदि के सैंपल लिए जा रहे हैं। जहां संदेह है वहा पर सामग्री नष्ट कराई जा रही है। यह अभियान होली तक जारी रहेगा।
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-सतीश कुमार, सहायक आयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन
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