संतकबीरनगर। सरकारी स्कूलों के बच्चों की बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार ने शतरंज समेत आठ नए खेलों को स्पोर्ट्स फॅार स्कूल कार्यक्रम में शामिल किया गया है। अब बच्चे शह और मात के खेल में राजा, वजीर, धोड़े, ऊंट, हाथी और प्यादे की बिसात बिछाते दिखेंगे।
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता में इसे शामिल किया है। शतरंज को बुद्धिमता का खेल माना जाता है। इसमें एक चाल से पहले आगे की तीन चाल सोचनी पडती है। यही कारण है कि इसमें शारीरिक श्रम की अपेक्षा बौद्धिक श्रम अधिक लगाना पड़ता है। अब तक सरकारी स्कूलों के खेल में यह शामिल नहीं था। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सत्र 2024-25 के शैक्षिक सत्र में स्पोर्ट्स फाॅर स्कूल कार्यक्रम में इसे शामिल किया है। इसको लेकर तैयारी शुरू हो गई है। शतरंज से बेहतर कोई खेल नहीं है। इससे बच्चों को बौद्धिक क्षमता में विकास होगा। डीआईओएस ने स्कूल खुलने के बाद खेल में शामिल बच्चों की सूची तैयार करने को कहा है।
यह खेल भी शामिल
योगासन, बुशू, कुराश, गतका, सेपक टकरा, किक वॉलीबाल, कलारीपट्टू, व मार्शल आर्ट को शामिल किया गया है।
शतरंज को माध्यमिक विद्यालयों में होने वाली वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता में शामिल किया गया है। शतरंज से बच्चों का बौद्धिक विकास होगा।
ओम प्रकाश मिश्र, डीआईओएस