जिला अस्पताल में नवजात को देखते चिकित्सक
संतकबीरनगर। छह महीनें से कम उम्र के बच्चों को भैंस, गाय का दूध उन्हे बीमार कर रहा है। जिला अस्पताल में बाल मरीजों की संख्या बढ़ रही है। बाल रोग विशेषज्ञ का कहना है कि छह महीने तक के बच्चों काे केवल मां का दूध ही पिलाएं। कम उम्र में मां का दूध छीनकर बच्चे को बीमारियों में न परोसे। जिला अस्पताल में प्रतिदिन इस तरह से 10 से 12 मामले आ रहे है।
जिला अस्पताल की ओपीडी के बाल रोग कक्ष में नवजात शिशुओ की समस्या को लेकर अभिभावक आ रहे है। इनमें छह महीने से कम उम्र के बच्चों की संख्या 10 से 12 है। बच्चे वर्तमान समय में डायरिया के साथ बुखार से पीड़ित हो रहे हैं। डॉक्टरों की मानें तो इनमें अधिकतर बच्चे वे हैं जिन्हें मां अपना दूध न पिलाकर गाय, भैंस और बकरी का दूध पिला रही हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके सिंह का कहना है कि छह महीने तक बच्चे को केवल मां का दूध ही पिलाएं।
उनका कहना है कि ईश्वर ने सभी बच्चों की माताओं का दूध उनके अनुसार बनाया है। इंसान के बच्चे के लिए अपनी माता का दूध ही सबसे अच्छा है। जानवर के बच्चे के लिए उसकी मां का दूध अच्छा है।
उन्होंने सलाह दी है कि छह माह से कम उम्र के बच्चों को मां का दूध न पिलाने से बच्चे डायरिया, अस्थमा के साथ बुखार और संक्रमण का शिकार होते हैं। साथ ही बड़े होने पर उन्हें डायबिटीज और मोटापा जैसी गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ता है।