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चुनावी मुद्दा: तीन दशक बाद भी खेतों की नहीं बुझी प्यास

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नेदुला के पास कूड़े से पटी नहर। - फोटो : amar ujala
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संतकबीरनगर। जिले के किसानों की सबसे बड़ी समस्या सिंचाई की है। अस्सी के दशक में बननी शुरू हुई सरयू नहर का काम अब भी अधूरा है। जहां नहर बनी भी है तो वहां पानी नहीं आता। इसके चलते किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए परेशान होना पड़ता है। मायूस किसान इस बार के चुनाव में सरयू नहर को बड़ा मुद्दा मानते हैं। 
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खेती में हरियाली लाकर किसानों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए अस्सी के दशक में सरयू नहर परियोजना की शुरुआत हुई थी। परियोजना की शुरुआत होने पर किसान काफी खुश थे, उन्हें उम्मीद थी कि खेतों की सिंचाई की समस्या का निदान होगा, लेकिन अब तक सरयू नहर परियोजना अधूूरी पड़ी है। लोकसभा चुनाव हो या फिर विधान सभा चुनाव, हर चुनाव में सरयू नहर मुद्दा बनती है, लेकिन चुनाव के बाद जनप्रतिनिधि व सरकारें भूल जाती हैं। एक बार फिर लोकसभा चुनाव की डुगडुगी बजते ही सरयू नहर परियोजना को किसान मुद्दा मान रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकारें किसानों की भलाई का दावा तो करती हैं लेकिन सवाल यह है कि जब खेतों को पानी नहीं मिलेगा तो किसानों की हालत कैसे सुधरेगी।  
किसान रामनिवास ने अपनी बात साझा करते हुए कहा कि सरयू नहर परियोजना अधूरी रहने से सिंचाई की व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। उन्होंने कहा कि नहर निर्माण के लिए प्रशासन ने किसानों की जमीन अधिग्रहीत की थी, लेकिन खेतों में एक बूंद पानी नहीं पहुंच सका। रमाकांत ने कहा कि जगह-जगह सरयू नहर अधूूरी है। यदि परियोजना पूर्ण हो जाए तो काफी हद तक सिंचाई की समस्या समाप्त हो जाएगी। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों को पहल करनी होगी। सुरेंद्र कुमार ने कहा कि कुछ स्थानों पर नहर बनी है और उसमें पानी भी छोड़ा जाता है, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि जब जरूरत रहती है तब पानी नहीं आता। कभी कभी तो पानी ऐसे समय में छोड़ा जाता है जब कोई जरूरत नहीं रहती, इससे फसलें बर्बाद हो जाती है। राजेेंद्र कुमार ने कहा कि यहां के लोगों के आय का मुख्य स्रोत खेती है, लेकिन सिंचाई संसाधन बदहाल होने से समस्या खड़ी हो रही है। उन्होंने कहा कि हर बार यही आश्वासन मिलता है कि जल्द ही सरयू नहर परियोजना पूर्ण हो जाएगी, लेकिन वह दिन कब आएगा, यह सवाल अब भी बना हुआ है। 
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