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समय से नहीं मिला राशन व कनवर्जन कास्ट का पैसा

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लॉकडाउन में लापरवाही पर जनपद के 1604 हेडमास्टरों को नोटिस जारी
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लॉकडाउन की अवधि के एमडीएम कन्वर्जन की रकम व राशन 15 जुलाई तक छात्रों को देना था
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। लॉकडाउन की अवधि के दौरान परिषदीय स्कूल बंद रहे। ऐसे में इस अवधि के एमडीएम की रकम व राशन बच्चों को दिए जाने का प्रबंध विभाग द्वारा किया गया था। वहीं, हर ब्लॉक से रकम व राशन की मांग की गई थी। फिर भी किसी भी ब्लॉक की ओर से मांग नहीं भेजी गई जिससे इस बड़ी लापरवाही पर बीएसए द्वारा जिले के 1604 हेडमास्टरों को नोटिस जारी किया गया है।
मध्याह्न भोजन योजना के तहत परिषदीय स्कूल के बच्चों को दिन में गरमागरम भोजन दिया जाता है जिसमे 1075 प्राथमिक विद्यालय, 443 उच्च प्राथमिक विद्यालय, 70 एडेड विद्यालय, एक संस्कृत विद्यालय, 15 मदरसा स्कूल के छात्र एमडीएम योजना के तहत लाभान्वित होते हैं। लॉकडाउन के दौरान परिषदीय विद्यालय पूरी तरह से बंद रहे। इस अवधि के दौरान एमडीएम के तहत बच्चों को कनवर्जन कास्ट की रकम व राशन देने का फरमान शासन ने जारी किया जिसके तहत कन्वर्जन कास्ट की रकम भी जारी की गई। लॉकडाउन की अवधि में एमडीएम के तहत कन्वर्जन कास्ट की रकम छात्रों के अभिभावकों के खाते में भेजा जाना था। जबकि राशन में आटा, चावल व दाल छात्रों में वितरित किया जाना था।
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विभाग द्वारा पहली किश्त के रूप में एक करोड़ रुपये जून में ही विद्यालयों के खाते में भेज दिया गया था और उसके बाद जरूरत के हिसाब से प्रधानाध्यापकों से राशन की उपलब्धता व रकम की मांग की थी ताकि 15 जुलाई तक सभी के खाते में दूसरी किश्त की रकम व राशन दिया जा सके। ब्लॉकों से यह मांग चार जुलाई तक आनी थी लेकिन किसी भी ब्लॉक से मांग नहीं आई।
लाभ से वंचित हुए डेढ़ लाख छात्र
इस लापरवाही के कारण योजना से लाभान्वित होनेवाले जिले के डेढ़ लाख विद्यार्थी वंचित रह गए। एक लाख 50 हजार छात्रों को लाभ मिलना है जिसमें लॉकडाउन अवधि के दौरान प्रति छात्र प्राथमिक स्तर पर 374 रुपये और जूनियर स्तर पर 561 रुपये खाते में भेजे जाएंगे।
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नोटिस जारी कर मांगा गया जवाब : बीएसए
बीएसए सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि एमडीएम योजना का पहली किश्त के रूप में एक करोड़ रुपये विद्यालयों के खाते में भेजे गए हैं। दूसरी किश्त की रकम भेजी जाएगी। 15 जुलाई तक छात्रों के अभिभावकों के खाते में पूरी रकम भेजे जाने की योजना थी। वहीं राशन भी देना था। इसके लिए प्रधानाध्यापकों से चार जुलाई तक मांग(डिमांड) की गई थी लेकिन किसी ने डिमांड नहीं भेजी। जिले के 1604 प्रधानाध्यापकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
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