संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। ब्रिटिश मौलाना शमसुल हुदा खान के खलीलाबाद शहर के मोतीनगर मोहल्ला में संचालित मदरसे का रजिस्ट्रेशन रजिस्ट्रार चिटफंड गोरखपुर के यहां से निरस्त कर दिया गया है।
वहां से पत्र प्राप्त होने के बाद अल्पसंख्यक विभाग की तरफ से मान्यता समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मदरसे में नियम को दरकिनार कर शिक्षक की भर्ती का भी मामला सामने आया है। जाली दस्तावेजों लगाकर दो शिक्षक की भर्ती की गई है। मौलाना के मदरसे के वैधता की की जांच एसडीएम व सीओ की टीम कर रही है। खलीलाबाद शहर के मोतीनगर मोहल्ला में संचालित ब्रिटिश मौलाना के मदरसे पर दिन प्रतिदिन शिकंजा कसता जा रहा है।
दोहरी नागरिकता के बाद सरकारी धन का गबन, जमीन खरीद फरोख्त करने और उस पर करोड़ों रुपये की लागत से मदरसा तैयार करने के बाद उसे जिला प्रशासन की तरफ से सील कर दिया गया। जिसके बाद मदरसे की वैधता पर सवाल उठने लगे। शिकायतकर्ता अब्दुल हकीम की मानें तो मदरसा संस्थापक व मैनेजर भ्रष्ट, धोखेबाज, जालसाज, समाज विरोधी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्त हैं।
मदरसा के प्रबंधन एवं संचालन में हवाला, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध स्रोतों से धन का लेन-देन शामिल है। मदरसे के भव्य निर्माण को पाकिस्तानी आतंकी संगठन दावत-ए-इस्लामी द्वारा वित्तपोषित किया गया है। प्राधिकरण की स्वीकृति एवं नियमों का उल्लंघन कर नाबालिग लड़कियों का छात्रावास निजी मकान में अवैध रूप से चल रहा है। इसमें लड़कियों की सुरक्षा के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
मदरसा प्रबंधक तथ्यों को छिपाकर व जाली दस्तावेज के माध्यम से केंद्रीय सरकार की संस्था एनआईईएलआईटी योजना सीएबीए-एमडीटीपी की स्वीकृति प्राप्त कर कंप्यूटर शिक्षा के लिए दो अध्यापकों को नियुक्त कर केंद्र सरकार से मासिक वेतन तथा सरकारी अनुदान व सहायता निधि प्राप्त की जा रही है। यह मदरसा उसी मदरसे की बाउंड्री से सटे ही एक भवन में चलाया जा रहा है। इसकी वैधता की जांच भी चल रही है।