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Sant Kabir Nagar News: पेंशन पर रोक के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा ब्रिटिश मौलाना

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संतकबीरनगर। दुधारा थाना क्षेत्र के देवरियालाल गांव निवासी पाकिस्तानी कनेक्शन और विदेशी फंडिंग का आरोपी ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान ने पेंशन बंद होने के मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। मौलाना की आजमगढ़ के मुबारकपुर स्थित मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिसबाहुल उलूम से जारी पेंशन अक्तूबर 2025 से बंद है।
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अपर निदेशक कोषागार एवं पेंशन आजमगढ़ मंडल के आदेश पर मुख्य कोषाधिकारी आजमगढ़ ने पेंशन पर रोक लगा दी है। इसकी बहाली के लिए मौलाना की तरफ से हाईकोर्ट प्रयागराज में 20 मार्च को याचिका दाखिल की गई है। इस पर सात अप्रैल को कोर्ट में सुनवाई होगी।
मौलाना पर पाकिस्तानी कनेक्शन व विदेशी फंडिंग का भी आरोप है, जिसकी कई एजेंसियां जांच कर रही हैं।
याचिका में उल्लेख किया है कि वर्ष 1984 में मौलाना मान्यता प्राप्त एवं अनुदानित मदरसे में सहायक शिक्षक (आलिया) के पद पर नियुक्त था। उसने करीब 33 वर्षों तक सेवा देने के बाद एक अगस्त 2017 से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले की, जिसे मदरसा प्रबंधन ने 10 अगस्त 2017 को स्वीकृत कर दिया।
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मौलाना शमशुल हुदा खान को आजमगढ़ के मुबारकपुर स्थित मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिसबाहुल उलूम मेंं शिक्षक के रूप में कार्य करने व स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद विभाग की तरफ से 19 नवंबर 2018 को पेंशन भुगतान आदेश जारी किया गया। इसके बाद उसे नियमित रूप से पेंशन मिलती रही। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ भेजे जाने के बाद पेंशन निर्बाध रूप से सितंबर 2025 तक दी जाती रही। इस बीच मौलाना से जुड़े मामले सामने आने के बाद पेंशन को बंद कर दिया गया। याचिका में यह जिक्र है कि वह दिसंबर 2013 में यूनाइटेड किंगडम का नागरिक बन गया। इसकी जानकारी उसने पूर्व में ही प्रबंधन को दे दी थी।
इसके बावजूद उन्हें सेवा में बनाए रखा गया और उन्होंने नियमानुसार कार्य किया। मामले में यह आरोप लगाया गया है कि व्यक्तिगत रंजिश के चलते उनके खिलाफ कुछ शिकायतें दर्ज कराई गईं, जिनमें झूठे और निराधार आरोप लगाए गए। इन्हीं परिस्थितियों के चलते अब उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
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मामले की पैरवी के लिए बेटे को किया अधिकृत
मौलाना शमशुल हुदा खान वर्तमान में जामा मस्जिद कंजुल इमाम एलबियन स्ट्रीट हेकमोंडबाइक वेस्ट यार्कशिर डब्लूएफ 16 ओएचआर इंग्लैंड में निवास कर रहा है। हाईकोर्ट में मुकदमे की पैरवी के लिए मौलाना ने अपने बेटे तौसीफ रजा को अधिकृत किया है। इसके लिए बकायदा भारत के महावाणिज्य दूतावास बर्घिंग्म यूके से अनुमोदन भी प्राप्त किया है। इस मुकदमे की पैरवी करने तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने वाले अन्य दस्तावेजों के लिए तौसीफ रजा को अधिकृत किया है, जिससे प्रयागराज हाईकोर्ट में मुकदमे की बराबर पैरवी होती रहे।
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16 लाख 59 हजार 555 रुपये रिकवरी का भी हो चुका है आदेश
मौलाना शमशुल हुदा खान वर्ष 2013 में ब्रिटेन की नागरिकता हासिल करने के बाद वर्ष 2017 तक दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिसबाहुल उलूम से आलिया सेक्शन के शिक्षक के रूप में वेतन लेता रहा। इसके बाद विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। इसके बाद से वह पेंशन लेता रहा। मामला खुलने के बाद हुए उच्चस्तरीय जांच में मौलाना के 16 लाख 59 हजार 555 रुपये मदरसा से सरकारी धन गलत रूप से लेने की पुष्टि हुई। इसके बाद इसकी रिकवरी का आदेश भी हुआ और फिर मामला कोर्ट के चक्कर में उलझा हुआ है। इसी मामले में मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिसबाहुल उलूम के प्रबंधक सरफराज ने मामले में प्राथमिकी भी दर्ज कराई है।
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याचिका में इनके शामिल हैं नाम
- स्टेट आफ यूपी एंड 6 अदर
- डायरेक्टर माइनारिटी वेलफेयर डिपार्टमेंट
- एडिशनल डायरेक्टर
- चीफ ट्रेजरी अफसर
- डिस्टि्रक्ट माइनारिटी वेलफेयर आफिसर
- एकाउंट ऑफिसर
- कमेटी आफ मैनेजमेंट
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