कथा सुनाते कथा वाचक पंडित हरीश मिश्र।
- फोटो : अंबरीश मिश्रा
मानव जीवन की सफलता का सारा श्रोत एवं अमरत्व प्राप्ति का श्रीमद्भागवत की कथा है। इस कथा को तन्मयता पूर्वक करने से ही भगवान शिव अमर हो गए। भागवत कथा में श्रीकृष्ण के बालरूप का दर्शन मिलता है। उक्त बातें मेंहदावल क्षेत्र के ग्राम एकला शुक्ल में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा केे समापन के दिन कथा वाचक पंडित हरीश मिश्र ने कहीं।
कथा प्रवचन में उपस्थित भीड़ को मानव दर्शन का बोध कराते हुए कहा कि मानव जीवन देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। इसकी सार्थकता संतसमागम व सत्कर्म से ही है। उन्होंने सत्संग और महात्म्य की व्याख्या बड़े बारीकी से किया। कहा कि जब अनेक जन्मों का भाग्य पुण्य उदय होता है तो सत्संग का लाभ प्राप्त होता ह। वहीं भागवत कथा श्रवण का नियम कथा क्यों सुननी चाहिए ? इसके सुनने से कौन सा फल मिलता है ? किन- किन लोगों ने कब और कौन सा फल प्राप्त किया। जिस ग्रंथ में मिल जाए वहीं महात्म्य है।
स्वामी जी ने कहा कि धन, बल और आयु से बड़ा भले ही कोई हो, परंतु भागवत भक्ति संपन्न हो ज्ञान से बड़ा है। वहीं सर्वश्रेष्ठ और सबके आदर का पात्र है। इस अवसर पर राधव प्रसाद शुक्ल, धीरज शुक्ल, गोल्डी शुक्ल, वैभव शुक्ल, इंद्रजीत शुक्ल, शशि मौलिक शुक्ल, सुनील शुक्ल, शक्ति कुमार, डॉक्टर इंद्रदेव, इंद्रासन, निशांत शुक्ल, अमित शुक्ल समेत अन्य लोग मौजूद रहे।