संतकबीरनगर। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर शासन ने स्कूल वाहनों के संचालन के नियमों को सख्त किया है। उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली में किए गए प्रावधानों के तहत डीजल/ सीएनजी से संचालित निजी ठेका बस 10 वर्ष से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए। स्कूल वैन की अधिकतम आयु भी 10 वर्ष निर्धारित है।
शिक्षा संस्था के स्वामित्व वाली बस के लिए आयु सीमा 15 वर्ष है। ऐसे में निर्धारित आयु पूरी कर चुके वाहनों से बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने पर रोक रहेगी और प्रबंध तंत्र की मनमानी पर रोक लगेगा। बसों में सीट बेल्ट, फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र और स्पीड लिमिट डिवाइस जरूरी है। बिना निर्धारित परमिट स्कूल वाहन नहीं चल सकेंगे। आपातकालीन द्वार-खिड़की समेत कई सुरक्षा इंतजाम अनिवार्य किया गया है।
शासन के निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि विद्यार्थियों को सार्वजनिक स्थान पर ले जाने के लिए किसी वाहन का इस्तेमाल तब तक नहीं किया जा सकता, जब तक उसके लिए निर्धारित परमिट जारी न हो। शिक्षा संस्था की बस के लिए निजी सेवा वाहन परमिट और ठेका वाहन के लिए संबंधित प्रावधानों के तहत परमिट जरूरी है। स्कूल वैन के लिए भी सक्षम प्राधिकारी से निर्धारित प्रक्रिया के तहत परमिट लेना अनिवार्य है।
स्कूल बस और ठेका बस की सभी सीटों पर सीट बेल्ट अनिवार्य की गई है। चालक को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सभी विद्यार्थी सीट बेल्ट बांधकर ही यात्रा करें। वाहन में फर्स्ट एड बॉक्स और अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था भी जरूरी है। ठेका बस में दो किलोग्राम क्षमता वाले बीआईएस मार्क अग्निशमन यंत्र लगाए जाने का प्रावधान है।
स्कूल वैन के लिए भी फर्स्ट एड बॉक्स और पांच किलोग्राम क्षमता वाला बीआईएस मार्क अग्निशमन यंत्र अनिवार्य है। वैन की सभी सीटें सीट बेल्ट से युक्त होनी चाहिए। सीएनजी वाहन में सिलिंडर के ऊपर सीट लगाने की अनुमति नहीं है।
स्कूली वाहनों की तेज रफ्तार पर भी लगाम लगाने की व्यवस्था की गई है। बस और वैन में स्पीड लिमिट डिवाइस लगाना जरूरी है, जिससे वाहन की गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक न हो सके। वाहनों में लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाने का भी प्रावधान है। नियम लागू होने के तीन माह बाद यह व्यवस्था प्रभावी होने की बात नियमावली में कही गई है। इसके साथ ही स्कूल वाहनों में सीसीटीवी कैमरा लगाने का प्रावधान भी किया गया है।
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आपातकालीन द्वार और खिड़की भी अनिवार्य
स्कूल और ठेका बसों में एक आपातकालीन द्वार और एक आपातकालीन खिड़की अनिवार्य है। आपातकालीन निकास की व्यवस्था इस तरह होनी चाहिए कि जरूरत पड़ने पर अंदर और बाहर दोनों ओर से खोली जा सके। पीछे की ओर आपातकालीन निकास खिड़की के शीशे को तोड़ने की व्यवस्था भी जरूरी है। चालक को वाहन के प्रवेश-निकास द्वार और पीछे के हिस्से का स्पष्ट दृश्य मिल सके, इसके लिए क्राॅस और रियर व्यू मिरर की व्यवस्था भी निर्धारित है।
बसों में विद्यार्थियों के बैग रखने के लिए सीट के नीचे रैक, खतरे की चेतावनी देने वाली लाइट और खिड़कियों में सुरक्षा के लिए स्टील की छड़ें भी निर्धारित की गई हैं। प्रेशर हॉर्न या मल्टीटोन हॉर्न प्रतिबंधित है, जबकि आपात स्थिति के लिए अलार्म घंटी या सायरन की व्यवस्था जरूरी है।
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स्कूल वाहन नियमानुसार ही चलेंगे, इसके लिए शासन से स्पष्ट आदेश मिला हुआ है। जांच के दौरान जो भी वाहन नियमानुसार नहीं पाए जाएगें, उनके खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई किया जाएगा।
-प्रियंवदा सिंह, एआरटीओ