- ठंड बढ़ते ही पांच हजार किमी की दूरी तय कर पहुंचे पक्षी,
पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी झील
संवाद न्यूज एजेंसी
बखिरा। ठंडक बढ़ते ही बखिरा झील में हजारों किमी दूरी से आने वाले प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा होने लगा है। झील में परिदों की कलरव से दृश्य आकर्षक हो गया है। प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए लोग की आवक बढ़ गई है। इससे झील पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
1990 में बखिरा झील को पक्षी विहार घोषित किया गया था, तभी से झील में चिड़ियों के शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया गया। 29 वर्ग किमी लगभग 2894.21 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैली इस झील के चारों तरफ दर्जनों गांव आबाद हैं। औसतन छह फीट की गहराई वाली कम ऊंचाई वाली वनस्पतियों और जलीय पौधों के काफी अनुकूल है। झील के पानी में 79 प्रजातियों और 42 कुलों के 119 पादप जातियों को सूचीबद्ध किया गया है।
इस पक्षी विहार के अथाह जलराशि ने कई तरह के जलीय जीव व पारिस्थितिक विविधताओं से भरपूर है। साइबेरिया व अन्य ठंडे प्रदेशों से आने वाले प्रवासी पक्षियों का चार माह तक बसेरा रहता है। चार माह तक झील पक्षियों की चहचहाहट से गुंजायमान रहता है। प्रवासी पक्षियों मे प्रमुख रूप से लालसर, शिवहंस, डुबडूबी, जलकौआ, सिलेटी अंजन, लाल अंजन, गाई, लाल गोई, रंगीन जांधिल, काला जाधिल, सफेद बाज, काला बाज, सवन, सुर्खाव, कपासी चील, बड़ा गरुण, नील सर, सारस, ताल मखानी चिड़ियां पर्यटकों को खूब आकर्षित करते हैं।
झील में चिड़ियों का आना शुरू हो गया है। प्रवासी पक्षियों के लिए इन दिनों मौसम काफी अनुकूल है। इनकी सुरक्षा के लिए झील में लगातार गश्त किया जा रहा है। झील में कहीं पर भी शिकार करते हुए पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- प्रीति पांडेय,
क्षेत्रीय वनाधिकारी