कीर्तन प्रस्तुत करतीं बीवी बलवंत कौर। संवाद
संतकबीरनगर। गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा में बैसाखी का पावन पर्व मंगलवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। प्रातःकाल पाठ साहब की समाप्ति के उपरांत भव्य कीर्तन दरबार का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरु के दरबार में मत्था टेका और अरदास में भाग लेकर सुख-समृद्धि की कामना की।
कीर्तन दरबार के दौरान बीवी बलवंत कौर ने “खालसा तेरो रूप है खास, खालसा में मैं करो निवास” जैसे भावपूर्ण शबदों का गायन कर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु गुरु भक्ति में लीन होकर कीर्तन का आनंद लेते रहे।
कार्यक्रम के समापन के पश्चात गुरु का अटूट लंगर देर शाम तक चलता रहा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर गुरुद्वारा के अध्यक्ष सरदार अजीत सिंह ने बैसाखी पर्व के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह ने वर्ष 1699 में आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना कर पंच प्यारे तैयार किए थे, जो साहस, त्याग और एकता के प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि बैसाखी का पर्व समाज में साहस, एकता और समृद्धि का संदेश देता है तथा अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा प्रदान करता है। इस अवसर पर सरदार प्रीतपाल सिंह, परविंदर सिंह, हरिभजन सिंह, सतविंदर पाल सिंह जज्जी, धर्म सिंह, जसबीर सिंह, हरि महेन्द्र पाल सिंह रोमी आदि मौजूद रहे।