धनघटा। धनघटा में स्थित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल बदहाली का शिकार होकर इलाज का इंतजार कर रहा है। दो कमरे और एक बरामदे में संचालित अस्पताल में न तो चहारदीवारी है न ही शुद्ध पानी और शौचालय का इंतजाम है। जबकि इस अस्पताल पर 50 से 60 मरीज इलाज के लिए प्रतिदिन पहुंचते हैं।
राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल पहले यहां से दूर गौरापार में संचालित हो रहा था। जब यहां अस्पताल के नाम से भवन का निर्माण हुआ तो अस्पताल स्थानांतरित होकर धनघटा आ गया। लेकिन अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं का ध्यान नहीं दिया गया। जिसका नतीजा है कि यहां आने वाले मरीज को प्यास लगने पर पानी पीने के लिए 100 मीटर की दूरी पर स्थित दुकान पर जाना पड़ता है। अस्पताल परिसर में पेयजल की कोई सुविधा नहीं है। शौचालय का भी निर्माण नहीं हुआ है।
इतना ही नहीं अस्पताल का चहारदीवारी भी नहीं बनाई गई। जिसके कारण च्ट्टा पशु अस्पताल परिसर में हमेशा विचरण किया करते हैं। इलाज के लिए यहां आई किरन, कुसुमावती, रामकेश, जगदीश, छोटेलाल, राजाराम आदि का कहना था कि धनघटा राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल पर डॉक्टर की नियुक्ति हुई है वह बराबर यहां पर बैठा भी करती हैं। लेकिन अस्पताल पर न तो पीने के लिए पानी की व्यवस्था है और न ही शौचालय का इंतजाम है।
अस्पताल की प्रभारी चिकित्सा डॉक्टर ज्योति कौशल बताती हैं कि पेयजल आदि का इंतजाम के लिए उच्च अधिकारियों को कई बार पत्र तो लिखा ही गया साथ ही साथ नगर पंचायत से भी चहारदीवारी आदि के निर्माण के लिए कहा गया।