संतकबीरनगर। आशाओं के जरिए प्रसूताओं को निजी अस्पताल ले जाकर डिलिवरी करने की शिकायत लगातार अधिकारियों के पास पहुंच रही है। अभी हाल ही में चुरेब पीएचसी से एक आशा कार्यकर्ता ने प्रसूता को निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां पर उसकी मौत हो गई थी। आशाओं की इस हरकत पर प्रशासन ने लगाम कसने का कार्य शुरू कर दिया है।
सीएमओ डॉ. रामानुज कन्नौजिया ने बताया कि निजी अस्पतालों में प्रसूताओं का प्रसव कार्य संपादित कराया जाता है। लगातार शिकायत मिल रही है कि आशा कार्यकर्ता प्रसूताओं की डिलिवरी सरकारी अस्पताल में न कराकर निजी अस्पताल में ले जाकर करा रही हैं। जिससे आंकड़े पूरे नहीं हो पा रहे हैं और न ही संस्थागत प्रसव में भी लक्ष्य पूरा हो पा रहा है।
ऐसे में इस तरह की हरकत करने वाली आशाओं को चिह्नित करने का कार्य किया जाएगा। इसके लिए सभी निजी अस्पताल अपने यहां पर होने वाली डिलिवरी की पूरी सूचना रखेंगे।
निजी अस्पताल में प्रेरित कर लाने वाली आशाओं का नाम भी संचालकों को बताना होगा। इसकी रैंडम जांच भी की जाएगी। संचालकों को हर माह की 20 तारीख तक रिपोर्ट कार्यालय में जमा करनी होगी। जो भी आशा इस कार्य में संलिप्त पाई जाएंगी उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
तीन माह पहले भी प्रसूता की हुई थी मौत : महुली कस्बे के एक निजी अस्पताल में तीन माह पहले एक प्रसूता की मौत हो गई थी। इस मामले में अस्पताल संचालक पर केस दर्ज हुआ था। बताया जा रहा था कि आशा कार्यकर्ता ने प्रसूता को निजी अस्पताल पहुंचाया था। जहां पर प्रसव के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद अस्पताल संचालक अस्पताल बंद कर फरार हो गया था।