संतकबीरनगर। जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी रवीश चंद्र ने बताया कि दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा राष्ट्रीय न्यास अधिनियम के तहत ऑटिज्म (स्वपरायणता), सेरेब्रल पाल्सी (प्रमस्तिष्क घात), मानसिक मंदता (बौद्धिक दिव्यांगता) और चहु-दिव्यांगता की श्रेणी में आने वाले दिव्यांगजनों के लिए कानूनी संरक्षणकर्ता की एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना संचालित है।
बताया कि अक्सर यह देखा जाता है कि 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद ऐसे दिव्यांगजन, जो स्वयं अपने हितों से जुड़े निर्णय लेने में अक्षम होते हैं, उन्हें कानूनी रूप से कोई संरक्षक न होने के कारण विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के समाधान हेतु राष्ट्रीय न्यास अधिनियम के अंतर्गत जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित स्थानीय स्तरीय समिति के माध्यम से ऐसे दिव्यांगजनों के लिए कानूनी अभिभावक नियुक्त किया जाता है।
यह कानूनी अभिभावक दिव्यांग व्यक्ति की संपति, स्वास्थ्य और अन्य व्यक्तिगत मामलों की देखभाल उनके सर्वोत्तम हित में करता है। संवाद