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Sant Kabir Nagar News: चुनाव की आहट से गांवों में बढ़ी हलचल

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सेमरियावां। पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही गांवों में सियासी सरगर्मी बढ़ने लगी है। संभावित प्रत्याशी घर-घर पहुंचकर लोगों से मेल-मुलाकात बढ़ा रहे हैं। कोई ग्रामीणों का हालचाल जान रहा है तो कोई सुख-दुख में शामिल होकर अपनी पैठ मजबूत करने में जुटा है। सामाजिक आयोजनों से लेकर गांव की चौपालों तक माननीयों की चुनावी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लंबे समय से निष्क्रिय दिखने वाले कुछ चेहरे भी अब सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आने लगे हैं।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से 14 अक्तूबर को उत्तर प्रदेश में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए जाने के बाद संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ी है। पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर के अदालत के आदेश को चुनौती न देने संबंधी बयान के बाद भी गांवों में चुनाव को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं। हालांकि, चुनाव की तारीख, आरक्षण और सीटों की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।
गांवों में संभावित प्रत्याशी लोगों के बीच पहुंचकर अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, ग्रामीण भी सड़क, नाली, पेयजल, आवास, पेंशन और रोजगार जैसे मुद्दों पर चर्चा करने लगे हैं। संभावित आरक्षण और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर भी दावेदार अपने समीकरण साधने में जुटे हैं। सीटों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही कई संभावित प्रत्याशियों की दावेदारी की तस्वीर साफ हो सकेगी।
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सेमरियावां ब्लॉक में 113 गांव में होगा चुनाव
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सेमरियावां ब्लॉक में 113 ग्राम पंचायतों में चुनाव होना है। ग्राम प्रधान के 113, क्षेत्र पंचायत सदस्य के 121, ग्राम पंचायत सदस्य के 1379 और जिला पंचायत सदस्य के पांच पदों के लिए चुनाव की संभावना है। पंचायत चुनाव में आरक्षण की भूमिका बेहद अहम होती है। किस सीट पर सामान्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग या महिला आरक्षण होगा, इसी के आधार पर प्रत्याशियों की स्थिति तय होती है। यही कारण है कि अधिकांश इच्छुक उम्मीदवार इस समय आरक्षण सूची का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। आरक्षण जारी न होने के कारण कई प्रत्याशी खुलकर मैदान में आने से बच रहे हैं लेकिन अंदर खाने तैयारियां तेज हो चुकी हैं। गांवों में यह चर्चा आम है कि अगर सीट हमारी जाति या वर्ग में आई, तो वही उम्मीदवार होगा। इसी उम्मीद में लोग अपने समर्थकों को जोड़ने, पुराने संबंधों को मजबूत करने और नए समीकरण बनाने में जुटे हुए हैं। करही, बाघनगर, सालेहपुर, दानोकुइयां, दुधारा, चिउटना, उसराशहीद, सेमरियावां, दरियाबाद, कोहरियावां मूड़डीहाबेग, देवरिया नासिर, रक्सा कला, पैड़ी, महुआरी, पुरवा आदि गांवों के चौराहे व चाय की दुकानों पर चर्चा कर चुनाव समीकरण बनते बिगड़ता देखा जा सकता है।
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त्योहारों से सोशल मीडिया तक सक्रियता
जनसंपर्क के पारंपरिक तरीकों के साथ सोशल मीडिया भी संभावित प्रत्याशियों के लिए अहम माध्यम बन रहा है। बधाई संदेशों, पोस्टर और इंटरनेट मीडिया के जरिये लोगों तक पहुंच बनाने की तैयारी की जा रही है। त्योहारों, सामाजिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भागीदारी के जरिये भी ग्रामीणों से संपर्क बढ़ाया जा रहा है। क्षेत्र के एजाज अहमद, जमील अहमद, मो वसीम खान, राम कुमार, तनवीर चौधरी आदि ने बताया कि

कोर्ट का आदेश आने के बाद गांव में हलचल तेज हो गई है। संभावित प्रत्याशी गलियों में घूमकर लोगों से संपर्क बढ़ाने लगे हैं। तीन महीने के भीतर चुनाव कराने के निर्देश के बाद गांवों में चुनावी माहौल बनने लगा है। संभावित प्रत्याशी लोगों से मेल-मिलाप बढ़ाने में जुट गए हैं। फिलहाल गांवों में बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के बीच सभी की निगाहें चुनाव कार्यक्रम और आरक्षण की स्थिति पर टिकी हैं। इनके स्पष्ट होने के बाद ही पंचायत चुनाव की तस्वीर और संभावित मुकाबलों की स्थिति सामने आएगी।
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