धनघटा। उपनिबंधक कार्यालय धनघटा के भवन निर्माण के मुद्दे पर सोमवार को अधिवक्ताओं व विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी में डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने लगभग दो घंटे तक वार्ता की।
मौके पर कार्यदायी संस्था का कोई अधिकारी मौजूद न होने पर डीएम ने मंगलवार को एआईजी स्टांप व कार्यदायी संस्था को तलब किया है। डीएम ने कोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद उपनिबंधक कार्यालय भवन निर्माण पर सहायक उप महा निरीक्षक निबंधन से जवाब मांगा।
विवादों में घिरे उपनिबंधक कार्यालय धनघटा के भवन निर्माण को लेकर अधिवक्ताओं के विरोध को गंभीरता से लेते हुए डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने सोमवार को सभी पक्षों को वार्ता के लिए बुलाया।
वार्ता में धनघटा तहसील के अधिवक्ता लाल शरण सिंह, प्रेम नरायन मिश्र, जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता ईश्वर चंद पाठक, दान दाता सुबास गुप्ता व एआईजी कलेक्ट्रेट पहुंचे। डीएम ने वार्ता के आठ बिंदु तय किए। एआईजी स्टांप से पहले बिंदु पर डीएम ने पूछा कि उपनिबंधक कार्यालय भवन निर्माण के लिए दान में मिली गई जमीन का बैनामा कब किया गया।
जमीन की चौहद्दी क्या सही है। डीएम ने पूछा कि दान में मिली भूमि का विभाग ने डीएम से अनुमति क्यों नहीं लिया। तीसरे बिंदु पर बगल स्थित जमीन के हुए बैनामे में जो चौहद्दी लिखी गई क्या वह सही है। अगले बिंदु पर देखा गया कि क्या उपनिबंधक विभाग सिविल कोर्ट के स्थगन आदेश का उल्लंघन किया है।
डीएम ने एआईजी से पूछा कि जब कार्यालय के लिए दान में मिली भूमि 28 फुट है तो 46 फुट में निर्माण कार्य कैसे किया जा रहा है। क्या निर्माण के दौरान सिविल कोर्ट के स्थगन आदेश का संज्ञान लिया गया। डीएम ने कहा उपनिबंधक कार्यालय भवन का नक्शा तैयार करने वाला इंजीनियर ने क्या कभी मौके का जायजा लिया। यदि जायजा नहीं लिया गया तो किस आधार पर 28 फुट की जगह 46 फुट में नक्शा बना दिया।
अधिवक्ताओं ने कहा कि दान में मिली भूमि मात्र 28 फुट चौड़ी है। लेकिन भवन के लिए 16 गुणा 30 मीटर क्षेत्रफल में नक्शा स्वीकृत किया गया जो पूर्णतः अवैधानिक है। जिलाधिकारी ने एआईजी स्टांप और कार्यदायी संस्था के जिम्मेदारों को मंगलवार को तलब किया है।