अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर प्रदर्शन करते बिजली कर्मी-स्रोत बिजली निगम
संतकबीरनगर। बिजली के निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल के विरोध में बिजली कर्मियों ने बृहस्पतिवार को अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर प्रदर्शन किया। निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित धरने में इंजीनियर राजेश कुमार ने कहा कि निजीकरण थोपने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बिजली के निजीकरण के निर्णय को निरस्त करने की मांग की। संघर्ष समिति के पदाधिकारी इंजीनियर पंकज कुमार ने कहा कि निजीकरण का फैसला उपभोक्ता और कर्मियों के हित में नहीं है। ऐसे में जब तब निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया जाएगा, तब तक आंदोलन चलता रहेगा। संघर्ष समिति के पदाधिकारी इंजीनियर धनंजय सिंह ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा एक वर्ष पूर्व घाटे के गलत आंकड़ों के आधार पर लिया गया था। संघर्ष समिति प्रारंभ से ही यह दावा करती रही है की सब्सिडी और सरकारी विभागों के सरकारी बकाया की धनराशि दे दी जाए तो विद्युत वितरण निगम घाटे में नहीं है। विद्युत नियामक आयोग ने संघर्ष समिति के इस दावे पर यह कहकर मोहर लगा दी है कि एक अप्रैल 2025 को विद्युत वितरण निगमों के पास 18925 करोड़ रुपये सरप्लस था। इसी आधार पर बिजली के टैरिफ में वृद्धि नहीं की गई है।
धरना- प्रदर्शन में इंजीनियर मुकेश गुप्ता, नारायण चंद्र चौरसिया, राघवेंद्र सिंह, अटेवा संघ के जिलाध्यक्ष दिनेश चौहान, हरिकिशोर, उदय राज यादव, संजय शर्मा, केएल यादव, अजय चौरसिया, चंद्र भूषण, राधेश्याम, दिलीप सिंह आदि शामिल रहे।