संतकबीरनगर। शहर के अग्रवाल नेत्रालय में दिसंबर माह में गलत ऑपरेशन के चलते 11 लोगों की आखें चली गई थीं। इसके साथ ही महुली क्षेत्र के व्यक्ति की संक्रमण के चलते मौत हो गई थी। इस मामले में महुली थाने में केस भी दर्ज कराया गया था।
इधर, मरीजों ने बताया कि वह दौड़ते-दौड़ते थक गए, नेत्रालय ने मुआवजा दिया लेकिन वह भी ऊंट के मुंह में जीरा है। अब वह इस पर लड़ाई नहीं लड़ेंगे। वहीं महुली में संक्रमण से मृत व्यक्ति के परिजनों ने दर्ज कराए गए केस को वापस ले लिया है। बता दें कि पीड़ित सहजनवा के नेवास निवासी बृजेश कुमार ने बताया कि उनकी मां समुनरा देवी के आंख का ऑपरेशन अग्रवाल नेत्रालय में 13 दिसंबर को हुआ था।
उनके साथ ही कोल्हुआ निवासी मंशा उर्फ मुनक्का, आटा कला निवासी जफर अली, महुली निवासी मृतक राजकिशोर, रामपलट समेत कुल 11 लोगों ने आंख का ऑपरेशन कराया था। इसके बाद से किसी की दाई आंख तो किसी की बाई आंख की रोशनी चली गई और आंख में संक्रमण हो गया। जिसकी वजह से आंख को निकलवाना पड़ा।
अस्पताल ने मुआवजा दिया लेकिन वह भी काफी कम है। जबकि इलाज में काफी पैसा खर्च हो गया। वहीं अन्य पीड़ितों ने भी बताया कि जो रकम मिली है उसी में संतोष कर रहे हैं। आगे अब और इस पर लड़ाई नहीं लड़ पाएंगे। हरपुर बुदहट निवासी रामपलट के बेटे रामदास का कहना है कि अस्पताल संचालक ने मुआवजा दिया है। अब आगे वह कोई लड़ाई नहीं लड़ेंगे।
मौत के मामले में लगा एफआर : अग्रवाल नेत्रालय में ऑपरेशन कराने के बाद आंख की रोशनी गंवाने वाले महुली क्षेत्र के सिकरी निवासी राजकिशोर की सात मार्च को मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर में संक्रमण पाया गया था। इस मामले में राजकिशोर के बेटे अमरजीत की तहरीर पर पुलिस ने अस्पताल संचालक अभिनव अग्रवाल पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया था। पुलिस की विवेचना के दौरान अमरजीत ने केस वापस ले लिया और चिकित्सक पर किसी भी तरह से कार्रवाई से इंकार कर इसका शपथ पत्र पुलिस को दिया था। जिसके बाद पुलिस ने इस मामले में एफआर लगा दिया।