जिंदा और मुर्दा के फेर में कई बुजुर्गोँ की पेंशन फंसी हुई है। हाल के दिनों में 11 ऐसी शिकायतें जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय को मिली हैं। इनमें शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उन्हेें मृत दिखाकर पेंशन बंद कर दी गई। इनमें से पांच मामलों में तीन दिन के भीतर सत्यापन रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन 15 दिन बाद भी रिपोर्ट नहीं मिली।
वर्तमान में संतकबीरनगर जिले में 54772 लाभार्थियों को वृद्धा और 50090 लोगों को समाजवादी पेंशन का लाभ मिल रहा है। पिछले वर्ष वृद्धा पेंशन के करीब 365 लोगों को मृतक/ अपात्र दर्शाया गया था, जबकि 562 ऐसे लोग पाए गए थे, जो दोहरे पेंशन का लाभ ले रहे थे। वहीं इस वर्ष अब तक करीब 769 से अधिक लोग समाजवादी पेंशन में अपात्र पाए जा चुके हैं। पिछले 15 दिनों में तहसील दिवस, डीएम कार्यालय और जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में 11 लोग आवेदन पत्र के साथ पहुंच चुके है, जो खुद को जीवित बताते हुए रिपोर्ट में मृतक दर्शा कर पेंशन बंद कर दिए जाने की शिकायतें कर चुके हैं। दो मामलो में डीएम के निर्देश पर हुई जांच में दोनों लाभार्थी जीवित पाए गए और उनकी पेंशन दुबारा शुरू की गई। ऐसे में साफ है कि सत्यापन रिपोर्ट ठीक प्रकार से नहीं तैयार की गई।
जिला समाज कल्याण अधिकारी उमाकांत शुक्ल ने बताया कि यह सच है कि 11 शिकायतें ऐसी मिली जो खुद को जीवित होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन उनकी पेंशन मृतक दर्शाए जाने से बंद हो चुकी है। पांच शिकायतों के मामले में संबंधित सत्यापनकर्ता लेखपाल और ग्राम पंचायत सचिव से नोटिस जारी करके तीन दिन में जवाब मांगा गया है, लेकिन समय बीत जाने के बाद भी वह अभी तक जबाव नहीं दिया गया। मामले को डीएम से अवगत कराते हुए संबंधित विभागों के विभागाध्यक्ष के माध्यम से सत्यापनकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति के साथ रिपोर्ट दी जाएगी।
दो दिन पूर्व सांथा क्षेत्र के एक जिला पंचायत सदस्य कार्यालय में आए थे और एक पेंशन के लाभार्थी की गलत रिपोर्ट के आधार पर पेंशन बंद कर दिए जाने का आरोप लगाया। जब उन्हें रिपोर्ट दिखाई गई कि लाभार्थी जिलेबा देवी विधवा और वृद्धा दोनों पेंशन का लाभ ले रही थी, इसी वजह से पेंशन बंद है तो वह चुप हो गए।