- मांझा क्षेत्र में आधा दर्जन गांवों में बाढ़ का खतरा
- चकदहा में तीन, भौवापार में एक नांव लगाई गई
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। क्षेत्र में सोमवार को सरयू नदी का जलस्तर स्थिर है। बाढ़ से मांझा क्षेत्र में बसे आधा दर्जन गांवों के पानी से घिरने का खतरा उत्पन्न हो गया है। आगापुर गुलरिहा गांव बाढ़ से चौतरफा घिर गया है। वहां लोगों को बाहर निकालने के लिए तहसील प्रशासन ने दो नाव लगाई है। वहीं दूसरी तरफ तुरकौलिया के पास एमबीडी तटबंध से जगह-जगह पानी का रिसाव होने की बात गांव के लोग बता रहे हैं।
बिड़हरघाट पर सोमवार की शाम नदी का जलस्तर 79.50 दर्ज किया गया। नदी खतरे के निशान से 35 सेमी नीचे बह रही है। नदी का जलस्तर पिछले 24 घंटे में स्थिर बना है लेकिन निकटवर्ती गांव पानी से घिरने लगे हैं। आगापुर गुलरिहा में संपर्क मार्ग पानी में डूबने से तहसील प्रशासन ने ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने के लिए दो नांव लगाई है। चकदहा में तीन, एक भौवापार में नांव लगाई गई है।
वहीं दौलतपुर व सियर कला गांव पानी से घिरने लगे हैं। तुरकौलिया, ढोल बजा, चपरा पूर्वी आदि आधा दर्जन गांव के ग्रामीणों में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। तुरकौलिया स्थित तटबंध पर नदी का दबाव लगातार बना है। यहां जलस्तर बढ़ने से तटबंध से पानी का रिसाव शुरू हो गया है। तुरकौलिया गांव के प्रधान वीरेंद्र यादव, बबलू, राम सुभग, तीरथ, राम चन्द्र आदि ने बताया कि बंधे में रिसाव होने से मैदानी क्षेत्रों में फसल पानी में डूबने लगी हैं।
लोगों ने बताया कि अगर रिसाव इसी तरह होता रहा तो आसपास के गांव में बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है। सरयू नदी तुरकौलिया नायक के पास एमबीडी बांध से सटकर बह रही है, जिससे बांध पर दबाव बन गया है।
फसलों को पहुंच रहा नुकसान
मांझा क्षेत्र के निचले हिस्से में पानी भर जाने से धान, अरहर और तिल की फसलें जलमग्न होकर बर्बाद हो रही हैं। फसलों की बर्बादी देख किसानों में मायूसी का माहौल देखा जा रहा है। क्षेत्र के छपरा मगर्वी, कुर्मियान टोला, खाले पूरवा, चपरा पूर्वी, खरगपुर, दौलतपुर, कंचनपुर आदि दो दर्जन से अधिक गांव के अधिकांश किसानों की खरीफ फसलें में पानी में डूब रही हैं। खाले पुरवा निवासी अशर्फीलाल, राम भजन, लोरिक, रामानंद, जितेंद्र, रवि कुमार आदि ने बताया कि पिछले नदी का जलस्तर बढ़ने से बची फसलें डूबने लगी हैं। किसानों की पूंजी डूब रही है।
बोले जिम्मेदार
नदी का जलस्तर बढ़ने पर तहसील प्रशासन सतर्क है। जहां नांव की जरूरत है वहां नांव भेजी जा रही है।
- योगेंद्र पांडेय, तहसीलदार
नदी अभी तक कहीं बाध से सटकर नहीं बह रही है और न हीं कहीं दबाव और रिसाव है।
- सतीश चंद्र, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग