संतकबीरनगर। आंख के ऑपरेशन के बाद पहले राजकिशोर की आंख की रोशनी चली गई। इसके बाद उसकी जान ले ली। राजकिशोर की मौत के बाद अन्य 10 पीड़ित जो अग्रवाल नेत्रालय में ऑपरेशन कराए थे वह भी सहमे हुए है। एक पीड़ित तो पीजीआई में अपनी दोनों आंख ऑपरेशन से निकलवा चुका है।
महुली के सिकरी निवासी राजकिशोर की मौत के बाद उनका बेटा अमरजीत ने बताया कि वह अहमदाबाद में काम करता है। उसके पिता भी अहमदाबाद में काम करते थे। उसने बताया कि 13 दिसंबर को अग्रवाल नेत्रालय के बारे में लोगों ने बताया कि पिता के आंख में हुए मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया। जिसके बाद से समस्या बढ़ने लगी। इसके बाद पिता को गोरखपुर दिखाया तो वहां भी राहत नहीं मिली।
नेपाल के भैरहवां ले गए उसके बाद पीजीआई और दिल्ली एम्स में दिखाया। इसमें करीब चार लाख रुपये खर्च हो गए। उनके बताया कि पहले पिता के आंख की रोशनी गई और अब उनकी मृत्यु हो गई। बताया कि मां रमना देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। बहन पूजा भी बदहवास है।
यहीं हाल अन्य पीड़ितों का है। जिसमें सहजनवां क्षेत्र के पिपरौली निवासी प्रमोद सिंह, नेवास निवासी समुद्रा, आटा कला निवासी जाफर अली, कोल्हुआ निवासी माया देवी, जयराम पट्टी निवासी द्रोपती, हरदी निवासी नितिश इस घटना के बाद सहम गए है। जिसमे प्रमोद सिंह ने संक्रमण के चलते पीजीआई में अपनी आंख ऑपरेशन कर निकलवा दिया।