संतकबीरनगर। फर्जी तरीके से वसीयतनामा तैयार कराने के आरोप में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चेतना त्यागी की अदालत ने संबंधित थाने की पुलिस को मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है। अदालत ने प्रकरण को प्रथम दृष्टया संज्ञेय प्रकृति का मानते हुए पुलिस जांच को जरूरी बताया है।
अरुण कुमार पांडेय ने न्यायालय में प्रार्थनापत्र दाखिल किया। उनका आरोप था कि विपक्षी कृष्ण सेवकदास ने उनके भाई ब्रह्मदेव के स्थान पर किसी दूसरे व्यक्ति को खड़ा कर फर्जी तरीके से वसीयतनामा करा लिया। अपने आरोपों के समर्थन में शपथपत्र के साथ पुलिस उच्चाधिकारियों को दिए प्रार्थनापत्र, वर्ष 2014 के वसीयतनामा व विक्रय पत्र समेत कई दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए।
अदालत के आदेश के अनुसार 17 दिसंबर 2014 को वसीयतनामा में ब्रह्मदेव ने अपने भाई, बहन और पत्नी होने से इन्कार किया। वहीं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत के नौ मार्च 2019 के आदेश में ब्रह्मदेव पांडेय का उत्तराधिकारी उनकी पत्नी सुदामा पांडेय को घोषित किया गया।
पीड़ित की ओर से दाखिल 19 दिसंबर 2014 के विक्रय पत्र में वह और उनके भाई ब्रह्मदेव ने संयुक्त रूप से संपत्ति का विक्रय किया था। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि दोनों दस्तावेजों में ब्रह्मदेव की तस्वीर अलग-अलग दिखाई दे रही है। इससे उनकी ओर से लगाए गए आरोपों को बल मिलता है।
मामले में थाना खलीलाबाद से आख्या भी मंगाई गई थी। पुलिस रिपोर्ट में बताया गया कि उनके शिकायती प्रार्थनापत्र के संबंध में थाने पर कोई अभियोग पंजीकृत नहीं था। दस्तावेजों और प्रार्थनापत्र के कथानक के आधार पर अदालत ने पुलिस जांच को न्यायसंगत माना।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चेतना त्यागी ने प्रार्थनापत्र स्वीकार करते हुए संबंधित थाना प्रभारी को उचित धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर विवेचना करने का निर्देश दिया है। आदेश की प्रति आवश्यक अनुपालन के लिए संबंधित थाने को भेजने का भी आदेश दिया गया है।