फाग गीतों की सजी महफिल, अबीर और गुलाल उड़ा कर लोगों ने खेली होली
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। रविवार की रात महुली कस्बे के यादव मोहल्ला स्थित काली माता मंदिर परिसर में फागुनी महफिल सजी थी। पूरी रात फागुनी गीतों की मिठास घुलती रही और श्रोता आनंद उठाते रहे। इस दौरान लोगों ने अबीर-गुलाल उड़ा कर होली भी खेली। हरिराम यादव ने गाया कि हे चलो बृज देखन होरी, होरी रंग बोरी, भींगे सब चोली... गीत पर श्रोता झूम उठे। अगला उलारा कुछ इस प्रकार रहा बिरज करबै बिहार... बिरज करबै बिहार, श्याम राधिका दोनों जनी।
गनेश विश्वकर्मा ने फाग गीत की शुरुआत की। बोल थे लिए पार ब्रह्म अवतार मनुज तन धारी, इस गीत पर फाग गायक टोली ने जमकर साथ दिया। उलारा गीत में होली खेलत रघुबीरा अवध में.. होली खेलत रघुबीरा पर श्रोताओ ने खूब तालियां बजाईं। दूसरा फाग गीत दीवान विनोद मिश्र ने पेश किया, बोल थे ठानत मोसे रार छैल बरजहू नहीं मानत, इस होरी गीत पर गायक टोली और उपस्थित फाग प्रेमियों ने साथ दिया। उलारा गीत में सिया डाले राम गले बरमाला... सिया डाले राम गले बरमाल पर लोग झूमने को विवश हो गए।
तीसरा फाग गीत हरिलाल यादव ने गाया, औरन संग रात बिताते हो बालम, भोर भये घर आए...। फाग गीत पर जमुना यादव, सुरज साहनी, राजेंद्र साहनी, श्याम सुंदर व किशोर ने जम कर साथ दिया। उलारा गीत पिया मोर गइल पुरवी बनिजिया, भला हो साजना... पर लोग थिरकने लगे। गनेश विश्वकर्मा ने गाया, छल करत श्याम बनवारी, बनि बैद बृज में पुकारी, दवा ले लो प्यारी, इस रसीली फाग गीत पर भावुक होकर श्रोता तालियां बचाने लगे।
इस तरह की गीतों का क्रम पूरी रात चलता रहा। लोग पूरी रात चाव के साथ फाग गीतों का आनंद उठाते रहे। ढोलक पर किशोर गौड़, बबलू और बिट्टू गुप्ता ने साथ दिया, तो हारमोनियम पर मुन्ना गौड़ रहे। इस अवसर राघव यादव, अंशुमान मिश्र विनोद मिश्र, हरिलाल यादव, जयप्रकाश, जमुना यादव, श्याम सुंदर साहनी आदि मौजूद रहे।