धनघटा। तहसील क्षेत्र में धनतेरस हर्षोल्लास और माधुर्य वातावरण में मनाया गया। दिन भर धनवंतरि भगवान का पूजन अर्चन चलता रहा। जगह-जगह मठ, मंदिरों पर मेले का आयोजन किया गया। प्रमुख बाजारों में आकर्षक ढंग से दुकानें सजी रहीं। बर्तन विक्रेताओं में गजब का उत्साह था।
मान्यता है कि धनतेरस के दिन धनवंतरि भगवान की पूजन अर्चन से व्यक्ति धन धान्य से समृद्धि बनता है। इस दिन नये बर्तन एवं चांदी के जेवरात खरीदने का प्रचलन है। पर्व को लेकर सुबह से ही लोगों में उत्सुकता रही। पहले घरों में पूजन अर्चन के बाद निकटवर्ती मंदिरों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। बाबा तामेश्वरनाथ धाम पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी रही। धनवंतरि भगवान और भोले शंकर की पूजा का सिलसिला देर शाम तक चला। महुली कस्बे में दुर्गा मंदिर, नाथनगर शिव मंदिर, धनघटा दानी नाथ मंदिर में मेले लगे रहे। दोपहर बाद दुकानों पर लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। देर रात तक बाजारों में चहल पहल रही। महुली का मुख्य बाजार दुर्गा मंदिर चौराहा, दक्षिण चौराहा, सब्जी मंडी इलेक्ट्रानिक झालरों से सजा होने के कारण आकर्षण का केंद्र रहा। जगह-जगह बर्तनों की दुकानें सजी रहीं। क्षेत्र के नाथनगर, हरिहरपुर काली जगदीशपुर, गिठीनी, कुशहवा, मुखलिसपुर, धनघटा, हैसर, लोहरैया, अशरफपुर, शनिचरा चौराहा, पौली आदि स्थानों पर भी दुकानें सज रहीं। लोगों ने अपने सामर्थ्य के अनुसार बर्तन, मिठाई, लाई, बताशा आदि की खरीदारी की। सोने, चांदी की दुकानों पर बहुत कम भीड़ जुटी।
हैैंसर प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के विभिन्न बाजारों में दोपहर बाद से लोग खरीदारी करते देखे गए। यही नहीं मोटरसाइकिल और ट्रैक्टर की दुकानों पर भी गाड़ी खरीदने वालों की अच्छी खासी भीड़ लगी रही।
श्रद्धा पूर्वक मनाई गई धन्वंतरि जयंती
संतकबीरनगर। भगवान धन्वंतरि की जयंती खलीलाबाद मुखिलसपुर चौराहे पर वैद्यनाथ आयुर्वेेद फार्मा के डीलर गुप्ता एजेंसी के भवन में मनाई गई। भगवान धन्वंतरि के चित्र पर माल्यार्पण करने के बाद दीप जलाया गया। डॉ. नागेंद्र मिश्र ने कहा कि प्रकृति के निर्माण के बाद ब्रह्मा ने रोग से पीड़ित प्राणियों की रक्षा के लिए कई औषधीय वनस्पतियों का निर्माण किया। डॉ. केसी पांडेय ने कहा कि भगवान धन्वंतरि पहले वैद्य कहे जाते हैं जो समुद्र मंथन में अमृत कलश लेकर अवतरित हुए थे। अमृत की बूंद छलक कर जहां-जहां गिरी वहां के वृक्ष, लता आदि औषधीय गुणाें से युक्त हुई। इस अवसर पर शिवा जी गुप्त, लालजी गुप्त, घनश्याम गुप्त, अनुराग कुमार गुप्त, आशुतोष कुमार मणि त्रिपाठी, इंद्रदेव पाठक समेत अन्य मौजूद रहे।