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धैर्य की कमी से चटक रही रिश्तों की डोर

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धैर्य की कमी से कमजोर पड़ रही रिश्तों की डोर
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जिले में केवल पिछले वर्ष ही पति-पत्नी विवाद के 289 मामले आए सामने
सहचर की जगह स्वयंभू हो रहे लोग, घरवालों का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं
एकल परिवारों की बढ़ती संस्कृति व स्वच्छंद जीवन शैली से बिगड़ रही बात
फोटो
उदयभान त्रिपाठी
संतकबीरनगर। दुधारा थाना क्षेत्र के रहमत अली (बदला हुआ नाम) की पत्नी शबरून्निशा नाराज होकर मायके चली गई। मामला महिला थाने के परिवार परामर्श केंद्र में पहुंचा। दोनों को बैठाकर बात शुरू हुई तो पता लगा कि ससुर ने डांट दिया था। पति ने पत्नी की जगह पिता का साथ दिया। इससे वह नाराज हो गई। धनघटा थाना क्षेत्र के महेंद्र सिंह पत्नी के व्यवहार से दुखी हैं और उसे साथ नहीं रखना चाहते। यह दो उदाहरण तो महिला थाने के परिवार परामर्श केंद्र में आ रहे मामलों में चुनिंदा हैं। इतना ही नहीं, मामूली बात पर अलग रहने या फिर जान देने-लेने जैसे आत्मघाती कदम उठाने की बात इन दिनों बढ़ रही है।
देवरिया में तीन बच्चों संग ट्रेन से कटी महिला के प्रकरण को ध्यान में रखते हुए संतकबीरनगर जैसे शांत जनपद में पारिवारिक विवाद की वजह तलाशने की कोशिश की गई तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। महिला थाने के परिवार परामर्श केंद्र में बीते वर्ष जनवरी से लेकर दिसंबर के बीच पति-पत्नी विवाद से संबंधित 289 मामले आए थे। हालांकि, इनमें से 238 मामलों में मामूली प्रयास के बाद सुलह भी हो गया। जबकि 42 मामले कोर्ट में लंबित हैं। सात प्रकरणों में दोनों पक्षों के जिद पर अड़े रहने की वजह से मुकदमा दर्ज कराना पड़ा। इसके अलावा कई ऐसे प्रकरण हैं जिनमें पति-पत्नी के बीच भरण-पोषण का मुकदमा चल रहा है। दोनों पक्ष हर तारीख पर पैरवी करने आ रहे हैं, लेकिन सुलह मंजूर नहीं है।
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मन से क्रोध नहीं निकला तो गड़बड़ होगी ही : डॉ: मंजू
एचआरपीजी कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू मिश्रा का कहना है कि यह कमजोर मनोवृत्ति का परिणाम है जो कुंठा व क्रोध के चलते बढ़ती जाती है। ऐसे मामलों में बदले की भावना भी प्रबल होती है। लोगों में सहिष्णुता की कमी होती जा रही है। संयुक्त परिवार में पति-पत्नी के बीच हुए विवाद को पहले घर के बड़े बुजुर्ग समझाकर खत्म करा देते थे। एकल परिवार में व्यक्ति अपनी पीड़ा किसी से कह नहीं पा रहा। बात सहन करना अब पिछड़ापन मान जाने लगा है।

व्यक्तित्व का हो रहा विघटन : डॉ. विजय
एचआरपीजी कॉलेज में समाज शास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विजय कुमार मिश्र का कहना है कि समाज में एकल परिवार के चलन के साथ ही उपभोक्तावादी संस्कृति भी बढ़ी है। पड़ोसी से संबंध भी खत्म हो रहा है। रिश्ते भी जरूरत के अनुसार चल रहे हैं। जरूरतें पूरी नहीं हुई तो पति-पत्नी, पिता-पुत्र, भाई-भाई के बीच विवाद सामान्य बात हो चली है। एकल परिवार में रिश्तों में आई गड़बड़ी को ठीक करने की कोई व्यवस्था नहीं है। व्यक्ति के साथ व्यक्तित्व का भी विघटन हो रहा है। इसीलिए लोग आत्मघाती कदम उठा रहे हैं।

थोड़ी सी मनुहार से संभल जाती है बात : महिला एसओ
महिला थाने की एसओ अनीता यादव का कहना है कि परिवार परामर्श केंद्र में आने वाले अधिकांश मामले थोड़ी सी मनुहार व डांट-डपट से सुलझ जाते हैं। कई ऐसे प्रकरण आते हैं जिसमें पति या पत्नी किसी मामले पर मिलकर निर्णय लेने की बजाय स्वतंत्र निर्णय लेना चाहते हैं। दूसरे को यह मंजूर नहीं होता और खुद को अपमानित महसूस करने लगता है। घर के सदस्यों का थोड़ा सा भी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं होता। परिवार परामर्श केंद्र में पति-पत्नी केे आमने-सामने बैठाकर समझाया जाता है तो वे खुद गलती मानकर साथ रहने को राजी हो जाते हैं।

परिवार परामर्श केंद्र की मदद लें
महिला थाने में परिवार परामर्श केंद्र स्थापित है, जहां हर रविवार को महिला एसओ तथा सामाजिक कार्यकर्ता रिफातुल्लाह अंसारी मौजूद रहकर समस्याएं सुनते हैं और दोनों पक्षों की काउंसलिंग कर मामले का समाधान निकालते हैं। ऐसे प्रकरण में सुलह-समझौता के बाद भी हालत नहीं सुधरने पर पीड़ित पक्ष दोबारा शिकायत कर सकता है। जरूरत होने पर पुलिस मुकदमा दर्ज कर जरूरी कानूनी कार्रवाई भी करती है।
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फोन पर भी ले सकते हैं मदद
ऐसे प्रकरण में पीड़ित पक्षकार महिला थाने के सीयूजी नंबर 9454404892 पर अपनी बात कह सकता है। पुलिस दोनों पक्षों को बुलाकर समझाती है। जरूरत होने पर घर पहुंचकर कानूनी संरक्षण देती है।
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