संतकबीरनगर। ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान के गलती की सजा मदरसे के 85 कर्मचारी व शिक्षक भी भुगत रहे हैं। मौलाना का आजमगढ जनपद के मुबारकपुर स्थित मदरसा दारूल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया में तैनाती थी। जिसकी मान्यता को भी मदरसा शिक्षा परिषद ने निलंबितकर दिया है। मान्यता निलंबन के बाद से ही सभी शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मियों का वेतन बाधितकर दिया गया। जिले के भी मदरसा का मान्यता निलंबित होने के बाद दो शिक्षकों पर अवैध तरीके से कंप्यूटर शिक्षा के नाम पर मानदेय लेने का आरोप लगा है।
मौलाना शमशुल हुदा खान ने आजमगढ जनपद के मुबारकपुर स्थित मदरसा दारूल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया में वर्ष 1984 में तैनात होकर अपनी सेवा देना शुरु किए। इसके बाद उनको वर्ष 2013 में ब्रिटिश नागरिकता मिल गया। इसके बाद भी मौलाना ने अनियमित तरीके से वेतन व पेंशन का लाभ लेना बंद नही किया। एटीएस के जांच के बाद इसका खुलासा हुआ। इसके बाद मदरसा शिक्षा परिषद ने मान्यता निलंबित कर दिया। चर्चाओं पर गौर करें तो आजमगढ़ जनपद का यह मदरसा पूर्वांचल का सबसे बड़े मदरसे में गणना होता है। यहां पर दीनी तालीम की अच्छी व्यवस्था हैं। मौलाना शमशुल हुदा के गलती की सजा यहां के सभी कर्मी व उनके परिवार के लोग उठा रहे हैं। मदरसे की मान्यता को लेकर अभी तक असमंजस की स्थिति बनी हुई है। डीएमओ आजमगढ़ वर्षा अग्रवाल की मानें तो मदरसा दारूल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया में सेवारत 85 शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मियों का वेतन मान्यता निलंबित होने के बाद रोक दिया गया है। शासन का जो निर्देश मिलेगा आगे उसके अनुरूप कार्रवाई होगा।
चार बड़े अधिकारियों पर गिरी निलंबन की गाज
एटीएस की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद कार्रवाई में तेजी आई। शासन ने मामले को गंभीरता से लेकर जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के चार बड़े अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। शासन ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक एसएन पांडेय, आजमगढ़ के तत्काली जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी साहित्य निकष सिंह, लालमन और प्रभात कुमार को निलंबित कर दिया। वर्तमान में साहित्य निकष सिंह गाजियाबाद, लालमन बरेली और प्रभात कुमार अमेठी में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात रहे। इन उच्चाधिकारियों पर हुई कार्रवाई के बाद पूरा महकमा सकते में है।