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प्रसव कराने के बाद नहीं मिलता प्रमाण पत्र

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- फोटो : www.pexels.com
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संतकबीरनगर। कलेक्ट्रेट सभागार में शुक्रवार को जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक हुई। इसमें डीएम रवीश गुप्त ने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को लोगों तक पहुंचाएं।
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बैठक जननी सुरक्षा योजना के तहत आशा वर्कर और माता को दिए जाने वाले भुगतान की स्थिति खराब मिली। वर्ष 2017-18 की तुलना में वर्ष 2018-19 में जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव दर कम हुई है। इस पर डीएम रवीश गुप्ता ने नाराजगी जताई और सुधार करने का निर्देश दिया। प्रभारी चिकित्साधिकारी ने बताया गया कि आशाओं को जिला अस्पताल में प्रसव कराने के बाद प्रमाण पत्र के लिए कई बार बुलाया जाता है। डीएम ने सीएमओ जांच कर दोषी के विरुद्ध कार्रवाई करने का निर्देश दिया। कहा, प्रत्येक आशा अपने क्षेत्र के 30 वर्ष आयु से अधिक महिला पुरुष की स्क्रीनिंग कराएं। इसके लिए उन्हें एक हजार रुपये का मानदेय दिया जाएगा।बैठक का संचालन अरविंद पांडेय ने किया। सीएमओ डॉ. हरगोविंद सिंह, डॉ. एसडी ओझा,डॉ. आलोक सिन्हा, आलोक प्रियदर्शी, सुश्री लक्ष्मी, प्रभारी चिकित्साधिकारी आदि उपस्थित रहे।


बाल मृत्यु का होगा सोशल ऑडिट
शासन के इस नए निर्देश की जानकारी देते हुए मंडलीय प्रबंधक अरविंद पांडेय ने बताया कि जिले में मरने वाले बच्चों का भी डॉक्टर की टीम द्वारा सोशल आडिट किया जाएगा। जिससे मृत्यु के कारण की सही जानकारी हो सके।
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गर्भवतियों का होगा अल्ट्रासाउंड
शासन के नए निर्देश के क्रम में अब गर्भवती का पूरे प्रसव काल में एक बार सरकारी खर्च पर अल्ट्रासाउंड कराया जाएगा। सीएचसी, पीएचसी, जिला अस्पताल पर आने वाली गर्भवतियों को डॉक्टर द्वारा निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर पर रेफर किया जाएगा। इसके लिए सेंटर को 300 रुपये प्रति केस का भुगतान किया जाएगा।

प्रधान सम्मेलन होगा
ग्राम प्रधानों का सम्मेलन जिले में संचालित समस्त स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देने, जागरूकता लाने तथा सुधार के दृष्टिकोण से शीघ्र ही जिले के सभी ग्राम प्रधानों का एक सम्मेलन कराया जाएगा। डीएम ने निर्देश दिया है कि सीएमओ तथा डीपीआरओ तिथि एवं स्थान निर्धारित कर सम्मेलन आयोजित कराएं।
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