संतकबीरनगर। छुट्टा पशुओं को रखने के लिए जिले की 68 ग्राम पंचायतों में पशु आश्रय स्थल के निर्माण का निर्देश दिया गया था। इसमें सिर्फ 22 पर निर्माण चल रहा है। 46 ग्राम पंचायतों में भूमि विवाद के चलते निर्माण शुरू ही नहीं हो सका। सत्यापन के दौरान यह मामला सामने आने पर प्रशासन ने पशु आश्रय केंद्रों के निर्माण के लिए गैर विवादित जगह तलाशने का निर्देश दिया है।
पशुपालन विभाग के अनुसार जिले में दो हजार से अधिक छुट्टा पशु हैं। ये पशु किसानों की फसलों का बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं। ये अक्सर लोगों पर हमला कर देते हैं। प्रदेश सरकार ने इस वर्ष के बजट जिले में 68 पशु आश्रय स्थलों के निर्माण को मंजूरी दी थी। लोकसभा चुनाव बीतने के बाद जब इन पशु आश्रय स्थलों की समीक्षा की गई तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। डीआरडीए के परियोजना निदेशक प्रमोद कुमार यादव के अनुसार सत्यापन के दौरान पता चला कि 68 में से केवल 22 ग्राम पंचायतों में ही पशु आश्रय केंद्रों का निर्माण कार्य चल रहा है। शेष 46 ग्राम पंचायतों में अब तक निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हो सका है। निर्माण कार्य नहीं होने की वजह जमीन संबंधी विवाद बताया गया है। इस तरह का एक प्रकरण बेलहर क्षेत्र में सामने आया जब डिप्टी डायरेक्टर पशुपालन इसकी जांच करने पहुंचे। अन्य क्षेत्रों से भी ऐसी ही जानकारी मिलने पर डीएम ने जिन स्थानों पर अभी पशु आश्रय स्थलों का निर्माण शुरू नहीं हुआ है वहां के लिए गैर विवादित जमीन तलाशकर जल्दी निर्माण शुरू कराने का निर्देश दिया। पीडी प्रमोद कुमार यादव ने बताया कि नए आदेश की जानकारी सभी बीडीओ को दे दी गई है। पशु आश्रय स्थलों का निर्माण कराने के लिए गैर विवादित भूमि चिह्नित करते हुए जल्दी निर्माण कार्य शुरू कराने को कहा गया है। कहा गया है कि किसानों की समस्या को देखते हुए धान की रोपाई शुरू होने से पहले निर्माण कार्य पूर्ण कराते हुए छुट्टा पशुओं को पकड़वाकर आश्रय स्थलों में रखा जाए।