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मासूम की मौत का मामला

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मेंहदावल। डेढ़ माह की मासूम की मौत सीएचसी में इलाज के अभाव में होने के बाद पीड़ित परिजनों के शिकायती पत्र पर अधीक्षक समेत चार चिकित्सक दोषी तो मिल गए पर स्वास्थ्य महकमा कड़ी कार्रवाई करने से कतराता रहा। शुक्रवार के अंक में ‘अमर उजाला’ ने ‘जांच में मिले दोषी, फिर भी नहीं हो रही कार्रवाई’ शीर्षक से खबर प्रकाशित किया तो स्वास्थ्य महकमा हरकत में आया और आनन-फानन में अधीक्षक को जिला अस्पताल से संबद्घ कर दिया। सिर्फ अधीक्षक का स्थानांतरण होने पर लोगों ने स्वास्थ्य विभाग व प्रशासनिक जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है।
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16 अगस्त को नायकटोला निवासी संतराम अग्रहरी के डेढ माह की मासूम बच्ची की तबियत खराब होने पर इलाज के लिए सीएचसी पहुंचे तो इंमरजेंसी डयूटी वाले डॉक्टर अपने आवास पर चले गये थे। अन्य चिकित्सकों ने इलाज करने से मना कर दिया था। अधीक्षक भी मौके पर नहीं थे। इलाज में देेरी से मासूम की मौत हो गई। तहसील दिवस पर पहुंची स्वास्थ्य सचिव ने जांच का आदेश दिया। जिसके बाद अपर सीएमओ की जांच में अधीक्षक समेत चार चिकित्सक दोषी मिले थे। अपर सीएमओ ने 23 अगस्त को अपनी जांच रिपोर्ट सीएमओ को दे दी थी। तबसे अधिकारी कार्रवाई की जगह मामले के अल्पीकरण में जुटे थे। आठ सितंबर के अंक में अमर उजाला ने जांच में मिले दोषी, फिर भी नहीं हो रही कार्रवाई शीर्षक से खबर प्रकाशित किया तो स्वास्थ्य महकमा हरकत में आ गया। आनन फानन में अधीक्षक डॉक्टर वी पी पांडेय का स्थानांतरण करते हुए जिला अस्पताल से संबंद्घ कर दिया। इसके साथ ही अन्य दोषी चिकित्सकों पर कार्रवाई न कर मामले के अल्पीकरण में जुट गया है। सीएमओ डॉक्टर ए सी श्रीवास्तव का कहना है कि अधीक्षक वीपी पांडेय लेबल फोर की श्रेणी में आते है उन्हे मेंहदावल सीएचसी से जिले के लिए स्थानांतरित कर दिया गया है। दोषी चिकित्सकों पर कड़ी कार्रवाई के प्रश्न पर सीएमओ चुप्पी साध गए। पीडित संतराम को यह कार्रवाई हजम नही हो रहा है। ऐसे में सीएचसी मेंहदावल के साथ ही प्रशासनिक जिम्मेदारों की किरकिरी हो रही है।
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