संतकबीरनगर। कबीर की परिनिर्माण स्थली मगहर में आमी को प्रदूषण से मुक्त करने की मुहिम अब तक परवान नहीं चढ़ सकी है। तीन स्थानों पर जल शोधन सयंत्र लगाने की योजना है, लेकिन कहीं जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई है तो कहीं बजट के अभाव में यह योजना अधर में लटकी हुई है। जल शोधन सयंत्र बनाए जाने के पीछे शासन की मंशा है कि कस्बों के नालों और नालियों का गंदा पानी साफ करके ही नदियों में गिरे, जिससे नदी को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
शासन ने जिले के खलीलाबाद, मगहर और बखिरा में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने के निर्देश दिए हैं। इसके पीछे कारण है कि कस्बों के नालों और नालियों का गंदा पानी जो सीधे नदियों में गिरता है, उसे रोका जा सके। इसके लिए निशुल्क जमीन की जरूरत है।
नगर पंचायत मगहर में करीब एक एकड़, खलीलाबाद में दो एकड़ और बखिरा में डेढ़ एकड़ जमीन की जरूरत है। प्रशासन का दावा है कि जमीन मिलते ही इन जगहों के लिए प्रस्ताव तैयार करा कर शासन को भेजा जाएगा।
सिद्धार्थनगर के सिकोहरा ताल से निकलकर गोरखपुर जिले में राप्ती में मिलने वाली 135 किलोमीटर लंबी आमी नदी का अधिकांश हिस्सा प्रदूषित है। औद्योगिक कचरा और शहरी क्षेत्रों के नालों और प्रदूषित पानी से नदी का प्रदूषित हो गया है। करीब चार साल पहले हाईपावर कमेटी के चेयरमैन न्यायामूर्ति डीपी सिंह के अगुवाई में एक टीम ने आमी नदी के उद्गम स्थल से गोरखपुर जिले में इसके अंतिम छोर तक का निरीक्षण किया था।
इसमें खलीलाबाद के चकपिहनी में 42 करोड़ व मगहर में 28 करोड़ रुपये से जल शोधन सयंत्र का प्रस्ताव बनाया गया था, लेकिन यह प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हो पाया। अब नए सिरे से जल निगम शहरी को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए प्रस्ताव बनाए जाने का निर्देश मिला है।